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MP HighCourt: पीएससी उम्मीदवारों को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- दो प्रश्नों को डिलीट करने का निर्णय सही

Sat, 07 Oct 2023 10:21 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 07 Oct 2023 10:21 PM IST
सार

जबलपुर निवासी रितिका पटेल व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि उन्होंने मप्र में राज्य निर्वाचन आयोग कब अस्तित्व में आया तथा दूसरा प्रश्न भारत छोड़ो आंदोलन कब हुआ। उनके उत्तर सही दिए थे। यदि उक्त दोनों प्रश्नों को डिलीट नहीं किया जाता तो वे मुख्य परीक्षा के लिए पात्र होते। 

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MP High Court: Shock to PSC candidates, High Court said - the decision to delete two questions is right
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने मप्र लोक सेवा आयोग के उन अभ्यार्थियों को झटका लगा है, जिन्होंने राज्य सेवा परीक्षा 2022 की प्रारंभिक परीक्षा के दो प्रश्नों को डिलीट किए जाने को चुनौती दी थी। जस्टिस जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने एक दर्जन उम्मीदवारों की याचिका खारिज कर दी। एकलपीठ ने लोक सेवा आयोग के निर्णय को सही ठहराया।
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एकलपीठ ने कहा कि दोनों ही प्रश्नों के सही उत्तर चारों विकल्पों में थे ही नहीं। इसके साथ ही जबलपुर हाईकोर्ट की बेंच ने इंदौर व ग्वालियर के 17 उम्मीदवारों की याचिका क्षेत्राधिकार के आधार पर निरस्त कर दी। न्यायालय ने उन्हें सक्षम बेंच के समक्ष याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी है। जबलपुर निवासी रितिका पटेल व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि उन्होंने मप्र में राज्य निर्वाचन आयोग कब अस्तित्व में आया तथा दूसरा प्रश्न भारत छोड़ो आंदोलन कब हुआ। उनके उत्तर सही दिए थे। यदि उक्त दोनों प्रश्नों को डिलीट नहीं किया जाता तो वे मुख्य परीक्षा के लिए पात्र होते।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि पहले प्रश्न का उत्तर याचिकाकर्ताओं ने नौ अगस्त 1942 दिया और दूसरे का उत्तर एक फरवरी 1994 दिया था। मामले में विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई और हाईकोर्ट ने माना कि एनसीईआरटी की बुक में यह स्पष्ट है कि आठ अगस्त की आधी रात को आंदोलन शुरू हुआ था और नौ अगस्त को कांग्रेस लीडर महात्मा गांधी समेत अन्य नेता गिरफ्तार हुए थे। यानी जवाब आठ अगस्त है जो विकल्प में नहीं था। इसलिए आयोग का फैसला सही है। वहीं दूसरे राज्य निर्वाचन आयोग के अस्तित्व के प्रश्न पर विशेषज्ञ कमेटी के पास आए दस्तावेज के आधार पर तय है कि अधिसूचना एक फरवरी को जारी हुई थी, वहीं 15 फरवरी को पहले आयुक्त की नियुक्ति के साथ वह अस्तित्व में आया। इसलिए आयोग का इन प्रश्न को डिलीट करना उचित है। जिस पर न्यायालय ने मप्र लोक सेवा आयोग के निर्णय को सही ठहराते हुए दायर याचिकाएं खारिज कर दीं।
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