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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP High Court Imposed A Cost Of Five Thousand Rupees For Not Presenting Report in Six Weeks

MP News: रायसेन प्रशासन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना, छह हफ्ते का समय दिया था, तीन साल में भी पेश नहीं की रि

Fri, 12 Aug 2022 07:51 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Fri, 12 Aug 2022 07:51 PM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन प्रशासन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला जांच रिपोर्ट का है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से छह हफ्ते में रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें तीन साल से रिपोर्ट पेश नहीं की है।

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MP High Court Imposed A Cost Of Five Thousand Rupees For Not Presenting Report in Six Weeks
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के एक मामले में रायसेन जिला प्रशासन से छह सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। तीन साल से अधिक का समय गुजरने के बाद भी रिपोर्ट पेश नहीं करने को जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंन्द्र सिंह की युगल पीठ ने गंभीरता से लेते हुए पांच हजार का जुर्माना लगाया है। युगल पीठ ने कॉस्ट की रकम याचिकाकर्ता के खाते में जमा करने के निर्देश जारी किए है।   
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रायसेन जिले के उदयपुरा निवासी योगेन्द्र सिंह की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसकी जमीन के सामने अतिक्रमण कर लिया गया है। शिकायत करने के बावजूद भी अतिक्रमण नहीं हटाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जांच कर अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि याचिकाकर्ता के प्लॉट के सामने अतिक्रमण कर बनाई गई झोपड़ी हटा दी गई है। याचिकाकर्ता ने अनावेदक भोला मेहरा पर सरकारी जमीन में मकान बनाने का आरोप लगाये है। उक्त जमीन सरकारी नहीं है।
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याचिकाकर्ता ने बताया था कि सरकारी रिकॉर्ड में अनावेदक के नाम पर उक्त जमीन नहीं है। उसने बिना अनुमति सडक व नाली के बीच मकान निर्माण कर लिया है। युगलपीठ ने दस मई 2019 में आदेश जारी किए थे कि मप्र सडक विकास निगम, कलेक्टर रायसेन तथा तहसीलदार उदयपुरा को जमीन तथा उस पर बने मकान की जांच करनी होगी। संबंधित दस्तावेज छह सप्ताह में पेश करने होंगे। युगल पीठ ने पाया कि तीन साल से अधिक का समय गुजरने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ है।  
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