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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP: Did not provide complete data of Nursing College, Court said - Petitioner should tell what is left

MP High Court: उपलब्ध नहीं करवाया नर्सिंग कॉलेज का पूरा डाटा, कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता बताए क्या रह गया बाकि

Fri, 22 Jul 2022 06:30 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 22 Jul 2022 06:30 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज के मामले में सुनवाई जारी है। फिलहाल डाटा पूरा नहीं होने पर बात अटक गई है। याचिकाकर्ता ने डाटा अधूरा बताया है तो मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल का कहना है कि पूरा डाटा उपलब्ध करवा दिया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए हैं कि क्या बाकि रह गया है, ये जानकारी पेश करें। 

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MP: Did not provide complete data of Nursing College, Court said - Petitioner should tell what is left
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज के मामले में सुनवाई जारी है। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ को बताया गया कि प्रदेश 453 नर्सिंग कॉलेज के एफिलेशन  तथा फैक्लटियों के संबंध में पूरा डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं करवाया गया है। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल का कहना है कि पूरा डाटा उपलब्ध करवा दिया गया है। युगलपीठ ने कौंसिल के जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है क्या-क्या जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है, इस संबंध में जानकारी पेश करें। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की  है।  
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लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित  मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
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याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि किस कॉलेज के कितने पेज के दस्तावेज हैं, इसका उल्लेख किया जाता है। हाईकोर्ट में पेष किए गए 453 नर्सिंग कॉलेज के दस्तावेजों में 37759 पेश गायब हैं। 80 कॉलेज ऐसे हैं, जिसमें एक व्यक्ति उसी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य था और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर थी। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।


सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं करवाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की थी। युगलपीठ ने 24 घंटों में डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने युगलपीठ को बताया कि पेन ड्राइव में उपलब्ध करवाया गया डाटा पूरा नहीं है। कौंसिल की तरफ से पूरा डाटा उपलब्ध करवाने की बात कही गयी। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पक्ष रखा। 
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