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Jabalpur News: 87 हजार से अधिक प्रकरणों का आपसी सामंजस से निराकरण, 413 करोड़ से ज्यादा की अवार्ड राशि पारित
Sun, 11 May 2025 08:42 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 May 2025 08:42 AM IST
सार
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए राज्य भर में कुल 1453 पीठों का गठन किया गया था। जबलपुर मुख्य पीठ व इंदौर-ग्वालियर खंडपीठ में छह-छह खंडपीठें और जिला न्यायालयों में 1447 पीठों ने परस्पर सहमति से विवादों का समाधान कराया। राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए राज्य भर में कुल 1453 पीठों का गठन किया गया था। जबलपुर मुख्य पीठ व इंदौर-ग्वालियर खंडपीठ में छह-छह खंडपीठें और जिला न्यायालयों में 1447 पीठों ने परस्पर सहमति से विवादों का समाधान कराया।
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87 हजार से अधिक प्रकरणों का हुआ निराकरण।
विस्तार
मप्र जबलपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालतें न्याय तक सुलभ, समयबद्ध व सार्थक पहुंच की प्रतिबद्धता का परिचायक हैं। ये न केवल लंबित मामलों की संख्या को घटाती हैं, बल्कि शांति व संतोष की भावना भी लौटाती हैं। वे शनिवार को वर्चुअल माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ कर रहे थे। नेशनल लोक अदालत में 87 हजार से अधिक प्रकरणों का आपसी सामंजस्य के साथ निराकरण किया गया। इसके साथ ही 413 करोड़ रुपये से अधिक की अवार्ड राशि पारित की गई।
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राष्ट्रीय लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष, हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश संजीव सचदेवा, सदस्य सचिव प्रदीप मित्तल, हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति इंदौर के अध्यक्ष जस्टिस विवेक रूसिया, ग्वालियर के अध्यक्ष जस्टिस आनंद पाठक, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे। मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मित्तल ने अवगत कराया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए सुबह से शाम तक कुल 3 लाख 35 हजार 204 सूचीबद्ध प्रकरणों में से 87 हजार 579 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इनमें 58 हजार 576 प्री-लिटिगेशन व 29 हजार 003 लंबित मामले शामिल थे। इस प्रक्रिया में कुल 41.299 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया।
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राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए राज्य भर में कुल 1453 पीठों का गठन किया गया था। जबलपुर मुख्य पीठ व इंदौर-ग्वालियर खंडपीठ में छह-छह खंडपीठें और जिला न्यायालयों में 1447 पीठों ने परस्पर सहमति से विवादों का समाधान सुनिश्चित कराया। हाईकोर्ट, जिला व तहसील विधिक सेवा समितियों के पदाधिकारी, अधिवक्ता, नगरीय निकाय, विद्युत कंपनियों, बैंक व पैरा लीगल वालंटियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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वर्षों पुराने विवाद हुए हल, खिले चेहरे
राष्ट्रीय लोक अदालत में भावनात्मक दृश्य भी सामने आए। किसी का वैवाहिक विवाद था, लेकिन समझाइश से पति-पत्नी दांपत्य जीवन में राजी-खुशी रहने को तैयार हो गए। किसी चेक बाउंस का विवाद दोनों पक्षों की समझदारी से खत्म हो गया। पड़ोसियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा मनमुटाव दूर हुआ। समाधान के बाद गले मिलकर अदालत कक्ष से बाहर निकले। सड़क दुर्घटना के मामलों में बीमा कंपनियों से समझौता होने पर इलाज के लिए समुचित राशि का लाभ मिल गया। इस तरह स्वजनों के चेहरे खिल उठे।
जिले और तहसीलों में 2578 प्रकरण हुए निराकृत
जिला अदालत जबलपुर व तहसील न्यायालय सिहोरा व पाटन में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के अध्यक्ष, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक अवस्थी ने दिशा-निर्देश दिए। सुबह से शाम तक आपसी सहमति से कुल 2578 प्रकरण निराकृत हुए। इस प्रक्रिया में नौ करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित हुआ।
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डालसा की सचिव शक्ति वर्मा ने बताया कि प्रकरणों के निराकरण के लिए कुल 73 खंडपीठों का गठन किया गया था। न्यायालयों में लंबित 926 और प्री-लिटिगेशन के 1652 प्रकरणों का निराकरण किया गया। आपराधिक शमनीय प्रकृति के 413 प्रकरण, धारा 138 एनआई एक्ट के 180 प्रकरण, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा के 56 प्रकरण, सिविल मामलों के 79 प्रकरण, विवाह संबंधित 60 प्रकरण और विद्युत अधिनियम के अंतर्गत 77 सहित अन्य प्रकृति के 34 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया।
चेक बाउंस के प्रकरणों में कुल 3 करोड़ 22 लाख 53 हजार 096 रुपये की समझौता राशि तय की गई। मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरणों में 1 करोड़ 43 लाख 9 हजार 650 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। विद्युत न्यायालयों में लंबित 77 प्रकरणों में 17 लाख 61 हजार 816 रुपये की वसूली हुई। इसी प्रकार बैंक रिकवरी के 131 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में निराकरण पश्चात 1 करोड़ 19 लाख 38 हजार 500 रुपये की समझौता राशि प्राप्त हुई।
