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Kanha National Park: नाले के किनारे बेसुध मिला था बूढ़ा बाघ, शरीर पर चोट के निशान, इलाज के दौरान मौत
Mon, 05 Jun 2023 07:29 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 05 Jun 2023 07:29 PM IST
सार
कान्हा नेशनल पार्क में एक बूढ़े बाघ की मौत हो गई। उसके शरीर पर अन्य बाघों के साथ संघर्ष के निशान भी थे। बाघ की हालत इतनी खराब थी कि वह चल भी नहीं पा रहा था। गांव के पास नाले में वह सुबह से शाम तक बेसुध पड़ा रहा।
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बेसुध बाघ की सूचना पर टीम हाथियों के साथ मौके पर पहुंची।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के स्थित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के समीप स्थित ग्राम पंचायत कोहका बैहर में एक बाघ की मौत हो गई। बाघ के शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी आयु लगभग 15 साल थी। संभवतया ये चोट बाघों के संघर्ष के दौरान लगी होंगी। बाघ कमजोरी के कारण चल पाने की स्थिति में नहीं था। वह नाले के किनारे बेसुध मिला था।
जानकारी के अनुसार बालाघाट जिले के बैहर तहसील से लगे कान्हा राष्ट्रीय पार्क से लगभग 5 किमी दूर ग्राम पंचायत कोहका में रविवार सुबह लगभग 11 बजे नाले के पास घायल नर बाघ दिखाई दिया था, जिसके कारण हड़कंप मच गया। देर रात तक बाघ नाले के किनारे बेसुध अवस्था में पड़ा रहा। उनके शरीर पर चोट के निशान दिखने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग और कान्हा प्रबंधन को दी। इसके पश्चात मौके पर पहुंचकर बाघ को बचाने की पूरजोर कोशिश की गई परंतु शाम 7.30 बजे के आसपास बाघ की मौत हो गई। बाघ टी-30 उमरपानी के नाम से पहचाना जाता था।
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जानकारी के अनुसार बालाघाट जिले के बैहर तहसील से लगे कान्हा राष्ट्रीय पार्क से लगभग 5 किमी दूर ग्राम पंचायत कोहका में रविवार सुबह लगभग 11 बजे नाले के पास घायल नर बाघ दिखाई दिया था, जिसके कारण हड़कंप मच गया। देर रात तक बाघ नाले के किनारे बेसुध अवस्था में पड़ा रहा। उनके शरीर पर चोट के निशान दिखने के बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग और कान्हा प्रबंधन को दी। इसके पश्चात मौके पर पहुंचकर बाघ को बचाने की पूरजोर कोशिश की गई परंतु शाम 7.30 बजे के आसपास बाघ की मौत हो गई। बाघ टी-30 उमरपानी के नाम से पहचाना जाता था।
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बाघ नाले किनारे पहुंचा और वहीं गिर गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
बताया जा रहा है कि बाघ कान्हा के बफर जोन से होते हुए सामान्य क्षेत्र में आ गया था। कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर एसके सिंह ने बताया कि बाघ कान्हा उद्यान का बड़ी उम्र का बाघ था। इसकी उम्र लगभग 15 साल के लगभग थी तथा उसके शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए। उसे नाले से बाहर लाने का प्रयास किया गया, लेकिन कमजोरी के कारण वह निकल पाने की स्थिति में नहीं था। घायल बाघ के विशेषज्ञों की मौजूदगी में रेस्क्यू कर उपचार करने का प्रयास किया गया। लेकिन उसकी हालात बेहद नाजुक होने के कारण सफलता नहीं मिली और बाघ की मौत हो गई। सोमवार को उसका पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया। बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और संभवतया पानी की तलाश में भटकता हुआ गांव के पास आ गया।
सिंह ने बताया कि शाम को कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मंडला और वन विभाग की टीम डाक्टरों के साथ मौके पर पहुंची। साथ में दो हाथियों को भी लाया गया। कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि घायल बाघ की उम्र का ये आख़री पड़ाव था और बाघ को ऐसी स्थिति मे डॉट गन से बेहोश करना उचित नहीं था। बाघ इतना कमजोर हो गया था कि वह दो कदम चलने लायक स्थिति में नहीं था और उसकी मौत हो गई।
सिंह ने बताया कि शाम को कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मंडला और वन विभाग की टीम डाक्टरों के साथ मौके पर पहुंची। साथ में दो हाथियों को भी लाया गया। कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि घायल बाघ की उम्र का ये आख़री पड़ाव था और बाघ को ऐसी स्थिति मे डॉट गन से बेहोश करना उचित नहीं था। बाघ इतना कमजोर हो गया था कि वह दो कदम चलने लायक स्थिति में नहीं था और उसकी मौत हो गई।
