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जबलपुर: आईपीएस कैडर पुनरीक्षण में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र की याचिका प्रवेश स्तर पर खारिज

Thu, 08 Oct 2026 03:11 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 08 Oct 2026 03:11 PM IST
सार

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने आईपीएस कैडर पुनरीक्षण में देरी के मामले में केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर कैट का आदेश बरकरार रखा। केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया 120 दिन में पूरी करनी होगी।

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Jabalpur: High Court stern over delay in IPS cadre review; Centre's plea dismissed at the admission stage.
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर पुनरीक्षण में देरी के मामले में केंद्र सरकार की याचिका प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अतिरिक्त कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया 120 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया समय-समय पर नियमानुसार होती रही है और इसमें किसी तरह की देरी नहीं हुई।

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कैट के आदेश को केंद्र ने दी थी चुनौती
मामला मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से दायर आवेदन से जुड़ा है। कैट, जबलपुर ने 9 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त आईपीएस कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 120 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई थी।

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केंद्र सरकार ने कैट के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि कैडर पुनरीक्षण का कार्य समयबद्ध तरीके से किया जाता रहा है। हालांकि, हाई कोर्ट ने केंद्र की याचिका को प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया। इससे कैट का आदेश प्रभावी बना हुआ है।

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राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के अवसरों का मामला
सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की ओर से दलील दी गई कि आईपीएस कैडर नियम, 1954 के तहत कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर की जानी चाहिए। लंबे समय तक पुनरीक्षण में देरी होने से पात्र राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के आईपीएस में शामिल होने के अवसर प्रभावित होते हैं।

अधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि कैडर पुनरीक्षण किसी समय किया गया था। नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि में पुनरीक्षण होना और पात्र अधिकारियों को अवसर मिलना जरूरी है।

120 दिन में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश बरकरार
हाई कोर्ट की युगलपीठ द्वारा कैट के आदेश को बरकरार रखे जाने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के लिए अतिरिक्त आईपीएस कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने पैरवी की। उन्होंने केंद्र सरकार की याचिका के आधारों का विरोध किया। यह फैसला राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कैडर पुनरीक्षण में देरी का असर उनकी वरिष्ठता, पात्रता और पदोन्नति के अवसरों पर पड़ सकता है।

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