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Jabalpur HC: सरकार की फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब पेश करने की मिली मोहलत, न्यायिक सुरक्षा से जुड़ा मामला
Tue, 20 Jun 2023 10:23 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 20 Jun 2023 10:23 PM IST
सार
मंदसौर के एक जज के साथ हुई अभद्रता की घटना को संज्ञान में लेते हुए न्यायालयों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मियों और परिसर की सुरक्षा के संबंध में जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के निर्देश दिए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश की गई फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब पेश करने के लिए हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त अधिवक्ता ने समय प्रदान करने का आग्रह किया।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। 23 जुलाई 2016 को न्यायिक अधिकारी राजवर्धन गुप्ता के साथ मंदसौर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभ्रदता करके उनके साथ झूमा-झटकी की गई थी।
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प्रारंभिक जांच, समाचार पत्र की संबंधित खबरों, वीडियो क्लिपिंग्स और अन्य साक्ष्यों से गुप्ता पर हुए हमलों की पुष्टि होने पर रजिस्ट्रार जनरल ने पूरा मामला तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन के समक्ष पेश किया था। पूर्व में दिए गए आदेशों के बाद भी इस तरह की घटना होने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के निर्देश दिए थे।
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याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के न्यायालय परिसर में पर्याप्त ऊंचाई की बाउंडी बॉल तथा पुलिस चौकियां की स्थापना, आवासीय परिसर में न्यायिक अधिकारियों व उनके परिवार की सुरक्षा तथा न्यायालय में सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश के 45 जिला न्यायालय में पर्याप्त ऊंचाई की बाउंडी बॉल, तीन जिला न्यायालय में बाउंडी बॉल की ऊंचाई पर्याप्त नहीं है तथा चार जिला न्यायालय में बाउंडी बॉल नहीं है। इसके अलावा प्रदेश के छह जिला न्यायालय में स्थाई तथा छह जिला न्यायालय में अस्थाई पुलिस चौकियां हैं। आवासिय परिसर में न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है।
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हाईकोर्ट की तरफ से नियुक्ति अधिवक्ता ने सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर आपत्ति व्यक्त करते हुए युगलपीठ को बताया था कि सिर्फ 40 जिला न्यायालय में पर्याप्त उचाई के बाउंडी बॉल है। इसके अलावा सरकार की तरफ से पेश स्टेटस रिपोर्ट में अन्य आपत्ति भी प्रस्तुत की गई। हाईकोर्ट ने सरकार को दोबारा स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे।
सरकार द्वारा स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट ने दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई थी। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की तरफ से नियुक्त अधिवक्ता ने फ्रेश रिपोर्ट पर लिखित जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया था।
