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MP News: जरूरी होने पर हाईकोर्ट करेगा वस्तुस्थिति की जांच, CBI जांचे MPNRC से मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेज
Mon, 05 Feb 2024 09:09 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 05 Feb 2024 09:09 PM IST
सार
मप्र हाईकोर्ट ने सीबीआई को मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल से मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि सीबीआई ने कई कॉलेजों की जांच नहीं की है। इसके बाद हाईकोर्ट ने मौखिक ये भी कहा कि आवश्यक होने पर हाईकोर्ट भी वस्तुस्थिति की जांच कर सकता है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने सीबीआई को निर्देशित किया है कि मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल से मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग कॉलेजों की जांच करें। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि आवश्यक होने पर हाईकोर्ट स्वंय वस्तुस्थिति की जांच करेगा।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में फर्जी तरीके से नर्सिंग कॉलेज संचालित होने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज पर संचालित हो रहे हैं। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि एक ही व्यक्ति कई नर्सिंग कॉलेज का प्राचार्य है और एक ही फैकल्टी अलग-अलग कॉलेज में कार्यरत है। जिन कॉलेजों में कार्यरत है उनकी दूरी सैकड़ों किलोमीटर दूर है। इसके अलावा माईग्रेट तथा डुप्लीकेट फैकल्टी का मामला भी याचिकाकर्ता की तरफ से उठाया गया था। युगलपीठ ने ग्वालियर तथा इंदौर खंडपीठ में लंबित नर्सिंग कॉलेज संबंधित याचिकाओं को मुख्यपीठ स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे।
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याचिकाओं की सुनवाई करते युगलपीठ ने प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई की तरफ से 308 नर्सिंग कॉलेज की जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की गई थी। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से आवेदन पेश कर बताया गया कि प्रदेश में लगभग कई नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई द्वारा नहीं की गई है। सीबीआई ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी से संबद्धता प्राप्त डिग्री कोर्स संचालित करने वाले कॉलेजों की जांच की है। डिप्लोमा कोर्स संचालित करने वाले कॉलेजों की जांच नहीं की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ फोटो पेश करते हुए युगलपीठ को बताया गया कि जिन नये कॉलेजों को मान्यता दी गई है, जो निर्धारित मापदंड का पालन नहीं कर रहें है।
सरकार की तरफ से सीबीआई ने जिन कॉलेजों में कमी पाई गई है उनके खिलाफ कार्रवाई करने तथा खामियां दूर करने के लिए मेडिकल यूनिवर्सिटी की कुलपति की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की बात कही गई। सरकार की तरफ से बताया गया कि संचालक चिकित्सा शिक्षा तथा मेडिकल कॉलेज के दो डीन सदस्य होंगे। इसके अलावा सरकार ने मेडिकल यूनिवर्सिटी को बीएससी नर्सिंग की परीक्षा कराने की अनुमति देने के लिए भी आवेदन दायर किया। याचिकाकर्ता की तरफ से गठित की जा रही कमेटी पर आपत्ति व्यक्त की गई। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया है कि कमेटी गठन के संबंध में अपना अभिमत प्रदान करें। युगलपीठ ने परीक्षा आयोजन की अनुमति संबंधित आवेदन पर अगली तिथि पर सुनवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
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गौरतलब है कि याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में फर्जी तरीके से नर्सिंग कॉलेज संचालित होने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज पर संचालित हो रहे हैं। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
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याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि एक ही व्यक्ति कई नर्सिंग कॉलेज का प्राचार्य है और एक ही फैकल्टी अलग-अलग कॉलेज में कार्यरत है। जिन कॉलेजों में कार्यरत है उनकी दूरी सैकड़ों किलोमीटर दूर है। इसके अलावा माईग्रेट तथा डुप्लीकेट फैकल्टी का मामला भी याचिकाकर्ता की तरफ से उठाया गया था। युगलपीठ ने ग्वालियर तथा इंदौर खंडपीठ में लंबित नर्सिंग कॉलेज संबंधित याचिकाओं को मुख्यपीठ स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे।
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याचिकाओं की सुनवाई करते युगलपीठ ने प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई की तरफ से 308 नर्सिंग कॉलेज की जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की गई थी। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से आवेदन पेश कर बताया गया कि प्रदेश में लगभग कई नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई द्वारा नहीं की गई है। सीबीआई ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी से संबद्धता प्राप्त डिग्री कोर्स संचालित करने वाले कॉलेजों की जांच की है। डिप्लोमा कोर्स संचालित करने वाले कॉलेजों की जांच नहीं की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ फोटो पेश करते हुए युगलपीठ को बताया गया कि जिन नये कॉलेजों को मान्यता दी गई है, जो निर्धारित मापदंड का पालन नहीं कर रहें है।
सरकार की तरफ से सीबीआई ने जिन कॉलेजों में कमी पाई गई है उनके खिलाफ कार्रवाई करने तथा खामियां दूर करने के लिए मेडिकल यूनिवर्सिटी की कुलपति की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की बात कही गई। सरकार की तरफ से बताया गया कि संचालक चिकित्सा शिक्षा तथा मेडिकल कॉलेज के दो डीन सदस्य होंगे। इसके अलावा सरकार ने मेडिकल यूनिवर्सिटी को बीएससी नर्सिंग की परीक्षा कराने की अनुमति देने के लिए भी आवेदन दायर किया। याचिकाकर्ता की तरफ से गठित की जा रही कमेटी पर आपत्ति व्यक्त की गई। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया है कि कमेटी गठन के संबंध में अपना अभिमत प्रदान करें। युगलपीठ ने परीक्षा आयोजन की अनुमति संबंधित आवेदन पर अगली तिथि पर सुनवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
