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Jabalpur News: 10 महीने बाद न्यायालय में करवाई गई शिनाख्त, हाईकोर्ट ने गैंगरेप के दो आरोपियों को किया दोषमुक्त
Fri, 17 Jan 2025 09:33 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2025 09:33 AM IST
सार
हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पहचान परेड में देरी अभियोजन पक्ष के लिए घातक है। अनुमान और संयोग के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस देवनारायण मिश्रा की युगलपीठ ने घटना के दस माह बाद न्यायालय में शिनाख्त परेड कराए जाने को गंभीरता से लिया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पहचान परेड में अत्यधिक विलंब और अन्य कमियों व विसंगतियों के कारण अभियोजन पक्ष का मामला संदेहास्पद है। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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जबलपुर के गढ़ा निवासी संजू सोनकर और अमर जाट की ओर से गैंगरेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। अपील में कहा गया था कि प्रकरण के अनुसार, पीड़िता 8 फरवरी 2012 को अपने चचेरे भाई के साथ शारदा मंदिर मदन महल दर्शन करने आई थी। सीढ़ियों से वापस लौट रही थी, तभी राहुल और अन्य अभियुक्त ने उन्हें रोककर पता पूछा। इसके बाद अभियुक्त उसे पहाड़ी के पीछे ले गए और उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया। इस दौरान उसका चचेरा भाई अभियुक्तों की गिरफ्त में था।
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पीड़िता के चचेरे भाई ने घटना की रिपोर्ट गढ़ा थाने में दर्ज करवाई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर अपीलकर्ताओं सहित एक आरोपी को गिरफ्तार किया। न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
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अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उनकी शिनाख्त परेड थाने में नहीं करवाई गई। घटना के 3 अक्टूबर 2012 को न्यायालय में करवाई गई। इस दौरान अपीलकर्ता अमर जाट के संबंध में पीड़िता ने अपने बयान में खुद कहा था कि घटना के बाद वह परेशान थी, इसलिए वह इस संबंध में कुछ नहीं बता सकती।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता और उसके चचेरे भाई ने यह स्वीकार किया कि अभियुक्तों द्वारा नाक की पिन लूटने का उल्लेख एफआईआर में नहीं किया गया था। घटना के बाद चचेरे भाई ने घर वापस जाने के लिए अभियुक्तों से सौ रुपये मांगे थे। इसके अलावा, चचेरे भाई ने खुद स्वीकार किया कि उसने घटना नहीं देखी, जबकि वह घटनास्थल पर उपस्थित एक स्वतंत्र गवाह था। एमएलसी रिपोर्ट के अनुसार भी पीड़िता को किसी प्रकार की चोट नहीं आई थी।
युगलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पहचान परेड में देरी अभियोजन पक्ष के लिए घातक है। अनुमान और संयोग के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता। युगलपीठ ने अपने आदेश में अपीलकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया।
