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जबलपुर: आदिवासी छात्रावास अधीक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट की रोक, 30 दिन में निर्णय के निर्देश

Wed, 21 Oct 2026 09:33 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 21 Oct 2026 09:33 PM IST
सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने आदिवासी छात्रावास अधीक्षकों के स्थानांतरण मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त को 30 दिनों में अभ्यावेदनों का निराकरण करने का आदेश दिया।

 

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High Court stays the transfer of tribal hostel superintendents
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आदिवासी छात्रावासों के अधीक्षकों के स्थानांतरण के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदनों का 30 दिनों के भीतर निराकरण किया जाए। एकलपीठ ने अभ्यावेदनों के निराकरण तक याचिकाकर्ताओं की वर्तमान पदस्थापना, सेवा और छात्रावास अधीक्षक के प्रभार के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

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याचिकाकर्ता श्रीमती मीरा मार्को सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में बताया गया कि जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने 1 अक्टूबर 2026 को सात वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर चुके छात्रावास अधीक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में आदेश जारी किए थे। इसके साथ ही भविष्य में ऐसे कर्मचारियों को छात्रावास अधीक्षक का प्रभार नहीं सौंपने का प्रावधान भी लागू किया गया था।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के बीच स्थानांतरण होने से उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर अप्रैल 2027 में शैक्षणिक सत्र समाप्त होने तक वर्तमान पदस्थापना पर बने रहने की अनुमति मांगी थी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि वे विभागीय नीति के अनुसार स्थानांतरण के विकल्प प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन स्थानांतरण की कार्रवाई शैक्षणिक सत्र समाप्त होने के बाद की जाए।

वहीं, शासन की ओर से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित हैं और उनका निराकरण विभागीय स्थानांतरण नीति के अनुसार किया जाएगा।

मामले की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त को निर्देश दिए कि प्रमाणित आदेश प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदनों का निष्पक्ष रूप से कानून और प्रचलित स्थानांतरण नीति के अनुसार निराकरण किया जाए। तब तक संबंधित याचिकाकर्ताओं की वर्तमान पदस्थापना और छात्रावास अधीक्षक के प्रभार के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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