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एमपी हाईकोर्ट : जेल में निरुद्ध करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती, संभागायुक्त रीवा को नोटिस

Wed, 21 Oct 2026 10:37 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 21 Oct 2026 10:37 PM IST
सार

रीवा निवासी ओम प्रकाश गुप्ता ने संभागायुक्त के आदेश पर भोपाल केंद्रीय जेल में निरुद्ध किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में हिरासत को असंवैधानिक बताया गया। हाईकोर्ट ने संभागायुक्त रीवा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

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A writ of habeas corpus filed to challenge one's detention in jail.
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संभागायुक्त रीवा के आदेश पर जेल में निरुद्ध किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। याचिका में हिरासत को अवैध बताते हुए आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए संभागायुक्त रीवा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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रीवा निवासी ओम प्रकाश गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन पर पिछले दस वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। याचिका के अनुसार, वर्ष 2025 से 2026 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चार अपराधों का उल्लेख किया गया था। इन मामलों में गांजे की मात्रा 80 ग्राम से पांच किलोग्राम के बीच बताई गई थी। दो मामलों में याचिकाकर्ता के पास से गांजा जब्त होने का उल्लेख था, जबकि अन्य दो मामलों में पकड़े गए आरोपियों के बयान के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया था। याचिका में यह भी कहा गया कि उन्हें किसी भी मामले में न्यायालय से सजा नहीं हुई है।

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याचिका के अनुसार, संभागायुक्त रीवा ने मामले की सुनवाई के बाद 5 अक्टूबर 2026 को पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत याचिकाकर्ता को भोपाल केंद्रीय जेल में निरुद्ध करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय जेल भोपाल में निरुद्ध कर दिया गया।

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याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आलोक तिवारी ने दलील दी कि आदेश के खिलाफ प्रदेश के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील करने के लिए उन्हें समय नहीं दिया गया। उन्होंने निरुद्ध किए जाने के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 14, 20 और 22 के विपरीत बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की युगलपीठ ने संभागायुक्त रीवा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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