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OBC Reservation: सुनवाई कर रहे जस्टिस पर नहीं है आरोप तो निष्पक्ष बैंच की जरूरत नहीं, HC ने खारिज किया आवेदन
Fri, 24 Mar 2023 07:23 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 24 Mar 2023 07:23 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने से संबंधित 64 याचिकाओं की सुनवाई के लिए निष्पक्ष बैंच गठित किए जाने की मांग को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने से संबंधित 64 याचिकाओं की सुनवाई के लिए निष्पक्ष बैंच गठित किए जाने की मांग को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। आवेदन पर हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस विरेन्द्र सिंह ने सुनवाई की। युगलपीठ ने आदेश में कहा है कि सुनवाई कर रही बैंच के जस्टिस पर किसी तरफ के आरोप नहीं लगे हैं। युगलपीठ ने चीफ जस्टिस से निष्पक्ष बैंच की अनुशंसा करने से इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि साल 2003 में शासन ने ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने के आदेश जारी किए थे। इस संबंध में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2014 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के आदेश को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव के पूर्व जून 2003 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन होने के कारण हाईकोर्ट के समक्ष पैनल लॉयर ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। इसके अलावा याचिकाओं की सुनवाई के लिए निष्पक्ष बैंच गठित किए जाने की मांग करते हुए युगलपीठ के समक्ष आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। ओबीसी, एसटी तथा एससी एकता मंच की तरफ से दायर आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि विशेष बैंच में ओबीसी तथा सामान्य वर्ग के न्यायाधीश नहीं होना चाहिए। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदन को खारिज करते हुए उक्त आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आदित्य संघी, शासन की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता आशीष बर्नाड तथा विशेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह ने पक्ष रखा।
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गौरतलब है कि प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ व पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि साल 2003 में शासन ने ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने के आदेश जारी किए थे। इस संबंध में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2014 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के आदेश को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव के पूर्व जून 2003 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन होने के कारण हाईकोर्ट के समक्ष पैनल लॉयर ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। इसके अलावा याचिकाओं की सुनवाई के लिए निष्पक्ष बैंच गठित किए जाने की मांग करते हुए युगलपीठ के समक्ष आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। ओबीसी, एसटी तथा एससी एकता मंच की तरफ से दायर आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि विशेष बैंच में ओबीसी तथा सामान्य वर्ग के न्यायाधीश नहीं होना चाहिए। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदन को खारिज करते हुए उक्त आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आदित्य संघी, शासन की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता आशीष बर्नाड तथा विशेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह ने पक्ष रखा।
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