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Jabalpur News: नियमित स्वीकृत पद में नियुक्त अतिथि शिक्षकों को नहीं मिल रहा न्यूनतम वेतन, सरकार से जवाब तलब
Thu, 30 Oct 2025 04:36 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 04:36 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों को नियमित पद का न्यूनतम वेतन न देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने मुख्य सचिव व संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि अतिथि शिक्षक समान कार्य के बावजूद कम वेतन पाकर अपने अधिकारों से वंचित हैं।
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नियमित स्वीकृत पद में नियुक्त अतिथि शिक्षकों को नहीं मिल रहा न्यूनतम वेतन
विस्तार
प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को नियमित स्वीकृत पद का न्यूनतम वेतन नहीं दिए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव, वित्त विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त लोक शिक्षण सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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देवास निवासी विकास कुमार नंदानिया व अन्य की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि सरकार नियमित स्वीकृत पद पर भर्ती नहीं करते हुए अतिथि शिक्षकों की भर्ती कर रही है। प्रदेश में लगभग 90 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। इन अतिथि शिक्षकों से नियमित शिक्षकों के सभी काम करवाए जाते हैं, लेकिन नियमित के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं दिया जाता है। इसके अलावा अतिथि शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान छुट्टी का लाभ भी नहीं मिलता है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला दिया गया, जिनमें यह निर्धारित किया है कि न्यूनतम वेतन से कम वेतन देना संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह व पुष्पेंद्र शाह ने पक्ष रखा।
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