{"_id":"62e56a7050b20802316c3ca8","slug":"determination-of-minimum-marks-in-interview-is-appropriate-in-civil-judge-examination-petition-dismissed","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP High Court: सिविल जज परीक्षा में उचित है इंटरव्यू में न्यूनतम अंक का निर्धारण, याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP High Court: सिविल जज परीक्षा में उचित है इंटरव्यू में न्यूनतम अंक का निर्धारण, याचिका खारिज
Sat, 30 Jul 2022 10:59 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 30 Jul 2022 10:59 PM IST
सार
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के बाद चयनित अभ्यर्थियों का इंटरव्यू लिया जाता है। इंटरव्यू में 50 में से 20 अंक प्राप्त करना अनिवार्य हैं।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सिविल जज परीक्षा के इंटरव्यू में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित किए जाने तथा परीक्षा फॉर्म में सगे रिश्तेदारों के ज्यूडिशियल सर्विस में होने की जानकारी मांगे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने चयन के लिए निर्धारित नियम को सही करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
आनंद कुमार लोवांशी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि मप्र ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स 1994 के तहत हाईकोर्ट द्वारा सिविल जज कनिष्ठ स्तर की परीक्षा का आयोजन किया जाता है। प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के बाद चयनित अभ्यर्थियों का इंटरव्यू लिया जाता है। इंटरव्यू में 50 में से 20 अंक प्राप्त करना अनिवार्य हैं। इंटरव्यू में निर्धारित अंक नहीं मिलने के कारण याचिकाकर्ता सिविल जज बनने से वंचित हो गया है। याचिका में हिमानी मल्होत्रा के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश व शेट्टी कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। याचिका में कहा गया था कि परीक्षा फॉर्म में परिवारिक सदस्य तथा रिश्तेदार का ज्यूडिशियल सर्विस होने की जानकारी देना अनिवार्य है।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खाजिर करते हुए अपने आदेश में कहा है कि हिमानी मल्होत्रा के मामले में नोटिफिकेशन के दौरान इंटरव्यू प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया था। सिविल जज की परीक्षा के नोटिफिकेशन के दौरान ही इंटरव्यू तथा निर्धारित अंक का उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंजूश्री के मामले में इंटरव्यू के लिए अंक निर्धारित किए जाने को सही ठहराया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पारिवारिक जानकारी इसलिए मांगी जाती है कि अभियर्थी की पृष्ठभूमि की जानकारी मिले सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
आनंद कुमार लोवांशी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि मप्र ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स 1994 के तहत हाईकोर्ट द्वारा सिविल जज कनिष्ठ स्तर की परीक्षा का आयोजन किया जाता है। प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के बाद चयनित अभ्यर्थियों का इंटरव्यू लिया जाता है। इंटरव्यू में 50 में से 20 अंक प्राप्त करना अनिवार्य हैं। इंटरव्यू में निर्धारित अंक नहीं मिलने के कारण याचिकाकर्ता सिविल जज बनने से वंचित हो गया है। याचिका में हिमानी मल्होत्रा के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश व शेट्टी कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। याचिका में कहा गया था कि परीक्षा फॉर्म में परिवारिक सदस्य तथा रिश्तेदार का ज्यूडिशियल सर्विस होने की जानकारी देना अनिवार्य है।
विज्ञापन
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खाजिर करते हुए अपने आदेश में कहा है कि हिमानी मल्होत्रा के मामले में नोटिफिकेशन के दौरान इंटरव्यू प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया था। सिविल जज की परीक्षा के नोटिफिकेशन के दौरान ही इंटरव्यू तथा निर्धारित अंक का उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंजूश्री के मामले में इंटरव्यू के लिए अंक निर्धारित किए जाने को सही ठहराया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पारिवारिक जानकारी इसलिए मांगी जाती है कि अभियर्थी की पृष्ठभूमि की जानकारी मिले सके।
विज्ञापन
