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MP News: पूर्व विधायक सुनीलम को नहीं मिली वीजा की अनुमति, हाईकोर्ट ने इस वजह से खारिज कर दिया उनका आवेदन

Mon, 13 Jul 2026 10:27 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 13 Jul 2026 10:27 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम की इराक यात्रा के लिए वीजा अनुमति संबंधी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उनकी आपराधिक अपील 14 वर्षों से लंबित है और अंतिम बहस के लिए उनके अधिवक्ता तैयार नहीं हैं। साथ ही, यात्रा का कोई आवश्यक कारण भी आवेदन में नहीं बताया गया। 

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Criminal appeal pending for 14 years; former MLA Sunilam denied visa permission.
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आजीवन कारावास की सजा पाए पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता डॉ. सुनीलम द्वारा इराक जाने के लिए वीजा जारी करने की अनुमति संबंधी आवेदन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि उनकी आपराधिक अपील पिछले 14 वर्षों से लंबित है और उनके अधिवक्ता अब तक अंतिम बहस के लिए तैयार नहीं हैं।

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गौरतलब है कि वर्ष 2012 में मुलताई गोलीकांड मामले में सत्र न्यायालय ने डॉ. सुनीलम सहित तीन आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए डॉ. सुनीलम ने वर्ष 2012 में हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। फिलहाल उन्हें इस मामले में सशर्त जमानत का लाभ प्राप्त है। इसी दौरान डॉ. सुनीलम की ओर से इराक यात्रा के लिए वीजा जारी करने की अनुमति संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आवेदन में इराक जाने का कोई स्पष्ट और आवश्यक निजी कारण नहीं बताया गया है।
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सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अंतिम बहस के संबंध में उन्हें अपने मुवक्किल से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस पर खंडपीठ ने टिप्पणी की कि अपील 14 वर्षों से लंबित है और अपीलकर्ताओं की ओर से ही अंतिम सुनवाई में रुचि नहीं दिखाई जा रही है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आम जनता में अक्सर यह धारणा बनती है कि न्यायालय समय पर कार्य नहीं कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में स्वयं पक्षकार और उनके अधिवक्ता ही सुनवाई में विलंब के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसी आधार पर खंडपीठ ने इराक यात्रा की अनुमति संबंधी आवेदन को विचार योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।

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