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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Cost of Rs 25000 on officials of electricity distribution company, case of not giving joining even after order

MP News: विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों पर 25 हजार की कॉस्ट, आदेश के बाद भी जॉइनिंग न देने का मामला

Thu, 18 Jan 2024 11:27 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 18 Jan 2024 11:27 PM IST
सार

याचिकाकर्ता प्रोग्रामर के पद पर पदस्थ है। उसका तबादला टीकमगढ़ से रीवा कर दिया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने टीकमगढ़ में ज्वाइनिंग दी तो चीफ इंजीनियर ने एक आदेश जारी कर ज्वाइनिंग देने से इंकार कर दिया। आवेदक की ओर से कहा गया कि उक्त रवैया न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। कोर्ट ने 25 हजार की कॉस्ट लगा दी। 

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Cost of Rs 25000 on officials of electricity distribution company, case of not giving joining even after order
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मप्र हाईकोर्ट ने पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी अनय द्विवेदी, सीजीएम नीता राठौर, सीई कांतिलाल वर्मा व अन्य पर पच्चीस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने अनावेदकों को 30 दिन के भीतर जुर्माने की राशि याचिकाकर्ता को अदा करने के निर्देश दिए हैं।
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बता दें कि यह मामला टीकमगढ़ निवासी जितेन्द्र तंतुवाय की ओर से दायर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा। जिन्होंने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता प्रोग्रामर के पद पर पदस्थ है। उसका तबादला टीकमगढ़ से रीवा कर दिया गया था। एक साल में तीसरा तबादला किया गया, इसलिए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने 9 फरवरी 2023 को अनावेदकों को निर्देशित किया था कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर निर्णय लें। साथ ही निर्देशित किया था कि अभ्यावेदन के निराकरण तक याचिकाकर्ता को वर्तमान पदस्थापना में ही कार्य करने दें। जब याचिकाकर्ता ने टीकमगढ़ में ज्वाइनिंग दी तो चीफ इंजीनियर ने एक आदेश जारी कर ज्वाइनिंग देने से इंकार कर दिया। आवेदक की ओर से कहा गया कि उक्त रवैया न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। वहीं मामले की सुनवाई दौरान विद्युत कंपनी के अधिकारियों की ओर से जवाब प्रस्तुत कर माफी मांगी गई और कहा गया कि उनसे अनजाने में चूक हुई है। उनका इरादा कोर्ट की अवहेलना करना नहीं था। इसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिए। 
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