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Jabalpur News: ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षक, याचिका पर 30 अक्टूबर को होगी सुनवाई
Fri, 24 Oct 2025 10:37 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Oct 2025 10:37 PM IST
सार
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस को लेकर विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
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स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को चुनौती
विस्तार
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राज्य के विभिन्न जिलों में पदस्थ शिक्षकों ने इस व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतों को लेकर याचिका दायर की है।
जस्टिस एम.एस. भट्टी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता शिक्षकों और राज्य सरकार दोनों को हलफनामे के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
जबलपुर निवासी मुकेश सिंह वरकड़े सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 27 शिक्षकों ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हमारे शिक्षक एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने में कई तकनीकी और व्यवहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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ये भी पढ़ें: Rewa News: जमीन विवाद में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, चार लोग घायल, पुरानी रंजिश के चलते हुई वारदात
शिक्षकों ने बताया कि कई शिक्षकों के पास बेहतर स्मार्टफोन नहीं हैं। हर महीने डेटा पैक का खर्च और मोबाइल की बैटरी चार्ज रखना मुश्किल हो जाता है। कई स्कूलों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या है। एप में सर्वर एरर और फेस वेरिफिकेशन की दिक्कतें भी आ रही हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उच्च अधिकारी वेतन रोकने की धमकी देकर शिक्षकों को ई-अटेंडेंस एप उपयोग करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि या तो बायोमीट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज कराई जाए या पूर्व की तरह कर्मचारी रजिस्टर में हस्ताक्षर प्रणाली लागू रखी जाए।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षकों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उन्होंने वास्तव में उक्त एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया है। वहीं सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन स्कूलों के आंकड़े प्रस्तुत करें, जहां ई-अटेंडेंस प्रणाली पहले से लागू है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
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जस्टिस एम.एस. भट्टी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता शिक्षकों और राज्य सरकार दोनों को हलफनामे के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
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जबलपुर निवासी मुकेश सिंह वरकड़े सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 27 शिक्षकों ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हमारे शिक्षक एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने में कई तकनीकी और व्यवहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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शिक्षकों ने बताया कि कई शिक्षकों के पास बेहतर स्मार्टफोन नहीं हैं। हर महीने डेटा पैक का खर्च और मोबाइल की बैटरी चार्ज रखना मुश्किल हो जाता है। कई स्कूलों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या है। एप में सर्वर एरर और फेस वेरिफिकेशन की दिक्कतें भी आ रही हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उच्च अधिकारी वेतन रोकने की धमकी देकर शिक्षकों को ई-अटेंडेंस एप उपयोग करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि या तो बायोमीट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज कराई जाए या पूर्व की तरह कर्मचारी रजिस्टर में हस्ताक्षर प्रणाली लागू रखी जाए।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षकों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उन्होंने वास्तव में उक्त एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया है। वहीं सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन स्कूलों के आंकड़े प्रस्तुत करें, जहां ई-अटेंडेंस प्रणाली पहले से लागू है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
