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Bhopal Gas Tragedy: हाईकोर्ट को जवाब-126 करोड़ का प्रस्ताव वित्त विभाग के पास लंबित, अगली सुनवाई 29 फरवरी को
Wed, 24 Jan 2024 09:02 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 24 Jan 2024 09:02 PM IST
सार
याचिका में कहा गया था कि भोपाल गैस त्रासदी के दौरान यूनियन कार्बाइड कंपनी से हुए जहरीले गैस रिसाव में लगभग 4 हजार से अधिक व्यक्ति की मौत हो गई थी। भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में करीब 350 मीट्रिक टन जहरीले कचरा पडा हुआ है।
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कोर्ट
- फोटो : file photo
विस्तार
भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड साइट से जहरीला कचरा नहीं हटाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा विनय सराफ की युगलपीठ को बताया गया कि जहरीला कचरा हटाने के लिए राज्य सरकार द्वारा 126 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया था। केंद्र सरकार ने उक्त प्रस्ताव को स्वीकृत प्रदान करते हुए उसे वित्त विभाग के पास भेज दिया है।
गौरतलब है कि आलोक प्रभाव सिंह द्वारा साल 2004 में उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि भोपाल गैस त्रासदी के दौरान यूनियन कार्बाइड कंपनी से हुए जहरीले गैस रिसाव में लगभग 4 हजार से अधिक व्यक्ति की मौत हो गई थी। भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में करीब 350 मीट्रिक टन जहरीले कचरा पडा हुआ है। याचिका में जहरीले कचरे के विनिस्टिकरण की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान लेकर कर रहा है।
केन्द्र सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 19 जून 2023 को ओवरसाइट कमेटी की बैठक हुई थी। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर कमेटी ने केन्द्र सरकार से इसके लिए 129 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की अनुशंसा की है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 10 जुलाई को मप्र सरकार के वित्त विभाग को अपेक्षित प्रस्ताव भेज दिया है। वित्त विभाग स्वीकृति के संबंध में शीघ्र निर्णय लेगा।
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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरुद्दीन ने पैरवी करते हुए युगलपीठ को बताया कि भोपाल गैस त्रासदी की घटना को 40 साल हो गए हैं। उक्त याचिका पिछले 20 सालों से लंबित है। जहरीला कचरा कार्बाइड साइट में पड़ा हुआ है और दोनों ही सरकारे मामले में हीलाहवाली कर रही हैं। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अगली सुनवाई 29 फरवरी को निर्धारित की है।
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गौरतलब है कि आलोक प्रभाव सिंह द्वारा साल 2004 में उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि भोपाल गैस त्रासदी के दौरान यूनियन कार्बाइड कंपनी से हुए जहरीले गैस रिसाव में लगभग 4 हजार से अधिक व्यक्ति की मौत हो गई थी। भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में करीब 350 मीट्रिक टन जहरीले कचरा पडा हुआ है। याचिका में जहरीले कचरे के विनिस्टिकरण की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान लेकर कर रहा है।
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केन्द्र सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 19 जून 2023 को ओवरसाइट कमेटी की बैठक हुई थी। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर कमेटी ने केन्द्र सरकार से इसके लिए 129 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की अनुशंसा की है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 10 जुलाई को मप्र सरकार के वित्त विभाग को अपेक्षित प्रस्ताव भेज दिया है। वित्त विभाग स्वीकृति के संबंध में शीघ्र निर्णय लेगा।
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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरुद्दीन ने पैरवी करते हुए युगलपीठ को बताया कि भोपाल गैस त्रासदी की घटना को 40 साल हो गए हैं। उक्त याचिका पिछले 20 सालों से लंबित है। जहरीला कचरा कार्बाइड साइट में पड़ा हुआ है और दोनों ही सरकारे मामले में हीलाहवाली कर रही हैं। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अगली सुनवाई 29 फरवरी को निर्धारित की है।
