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Bhopal Gas Tragedy: अवमानना याचिका पर बैंस, मोहम्मद सुलेमान समेत नौ के खिलाफ सुनवाई टली, अब 24 को होगा फैसला
Wed, 17 Jan 2024 07:31 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 17 Jan 2024 07:31 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, एसीएस मोहम्मद सुलेमान समेत नौ अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना मामले की सुनवाई टल गई है। अब हाईकोर्ट पहले 19 जनवरी को पुनर्विचार याचिका सुनेगा। फिर 24 जनवरी को याचिका को सुनेगा।
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जबलपुर हाई कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के पुनर्वास और उपचार संबंधी मामलों में लापरवाही बरतने के आरोपों पर कोर्ट की अवमानना का सामना कर रहे केंद्र और प्रदेश के मौजूदा और पूर्व अफसरों को फौरी राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तय किया है कि एसीएस मोहम्मद सुलेमान समेत तीन अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराने के फैसले पर दाखिल पुनर्विचार याचिका को सुना जाएगा। उसके बाद उन तीन समेत नौ अफसरों के खिलाफ अवमानना के आरोपों पर सुनवाई की जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए गैस पीड़ितों के पुनर्वास और उपचार के लिए 20 बिंदुओं का आदेश जारी किया था। इसकी निगरानी के लिए मॉनीटरिंग कमेटी बनाने के निर्देश देकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। हर तीन महीने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर मॉनीटरिंग कमेटी को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपनी थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना के मामले में 28 नवंबर 2023 को प्रदेश सरकार के एसीएस मोहम्मद सुलेमान के साथ-साथ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अमर कुमार सिन्हा तथा विजय कुमार विश्वकर्मा को अवमानना का दोषी करार दिया है। सरकार ने अधिकारियों को दोषमुक्त करने की मांग करने के साथ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। उस पर 19 जनवरी को सुनवाई होनी है। जस्टिस शील नागू और जस्टिस विनय सराफ की बैंच को इस बात की जानकारी दी गई। इसके बाद तय हुआ कि इन तीन अफसरों के साथ-साथ पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना मामले में अगली सुनवाई अब 24 जनवरी को की जाएगी।
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अलग-अलग याचिका हुई है दाखिल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने के आरोपों पर हाईकोर्ट में 2015 में अवमानना याचिका दाखिल हुई थी। इस पर ही 28 नवंबर को हाईकोर्ट ने तीन अफसरों को अवमानना का दोषी करार दिया था। इसके साथ ही अवमानना कार्यवाही के संबंध में जवाब प्रस्तुत करने निर्देश जारी किए थे। साथ ही अन्य अनावेदकों केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की सचिव एमएस आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ उप महानिदेशक आर. रामकृष्णन, भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. प्रभा देसिकन तथा डॉ. राज नारायण तिवारी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही के निर्देश रजिस्ट्री को जारी किए गए थे। इस पर ही बुधवार को सुनवाई हुई। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई है, जिस पर 19 जनवरी को सुनवाई होगी।
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अवमानना याचिका में लगाए हैं यह आरोप
अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस पीड़ितों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। अस्पतालों में आवश्यकतानुसार उपकरण व दवाएं नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का निर्धारण नहीं होने से डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ स्थायी तौर पर सेवाएं नहीं देते। मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट के बिंदुओं में से सिर्फ तीन बिंदुओं पर ही काम हुआ है। इस वजह से कारण पीड़ितों का उपचार नहीं हो रहा। उन्हें भटकना पड रहा है। युगल पीठ ने सरकार को सभी मामले में रिपोर्ट पेश करने का आदेश जारी किया। साथ ही इस मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को करना तय किया है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ, राजेश चंद्र, अंशुमान सिंह उपस्थित हुए।
