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Bhopal Gas Tragedy: 3000 पेज में गैस त्रासदी के पीड़ितों की रिपोर्ट, सरकार बोली-ऑनलाइन करने में लगेंगे 550 दिन

Wed, 08 Jan 2025 03:01 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 08 Jan 2025 03:01 PM IST
सार

सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश कर कहा किया गया कि 2014 से पहले के मेडिकल रिकॉर्ड बहुत पुराने हैं। ऐसे में हर दिन केवल 3000 पृष्ठों को ही स्कैन किया जा सकता है। अनुमान के अनुसार, इस कार्य में लगभग 550 दिनों का समय लगेगा। कार्य प्रारंभ होने के बाद ही अंतिम समय सीमा बताई जा सकेगी।

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Bhopal Gas Tragedy 3,000-Page Report on Victim Government Says Online Publication Will Take 550 Days
भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण (ऑनलाइन) करने के संबंध में दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विशाल जैन की युगलपीठ ने आदेश जारी कर सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सचिव और बीएमएचआरसी के निर्देशक को संयुक्त बैठक कर मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण करने के संबंध में अंतिम कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि अनावेदक निर्धारित बिंदुओं पर कार्य पूर्ण करने के प्रति गंभीर नहीं है। हाईकोर्ट की ओर से याचिका पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। 

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सरकार बोली- 550 दिनों का समय लगेगा
सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश कर कहा किया गया कि 2014 से पहले के मेडिकल रिकॉर्ड बहुत पुराने हैं। ऐसे में हर दिन केवल 3000 पृष्ठों को ही स्कैन किया जा सकता है। अनुमान के अनुसार, इस कार्य में लगभग 550 दिनों का समय लगेगा। कार्य प्रारंभ होने के बाद ही अंतिम समय सीमा बताई जा सकेगी। इसके अलावा, एनआईसी की तरफ से ई-हॉस्पिटल परियोजना के अंतर्गत क्लाउड सर्वर की स्थापना के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जो वित्तीय अनुमोदन के लिए वित्त विभाग के पास लंबित है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट आवंटित किया जाएगा। इसके बाद स्कैन किए गए अभिलेख को उक्त सर्वर में समाहित कर दिया जाएगा। एनआईसी द्वारा दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, सम्पूर्ण कार्य एक साल में पूर्ण किया जाएगा।
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20 निर्देश किए गए थे जारी  
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी। पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। इससे संबंधित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। याचिका लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का पालन नहीं किए जाने के खिलाफ 2015 में अवमानना याचिका भी दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में अधिवक्ता अंशुमान सिंह उपस्थित हुए।
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