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Jabalpur: एक जैसे मामले में दो हाईकोर्ट के दो फैसले, आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने दी आरोपी को राहत
Thu, 15 Sep 2022 09:26 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 15 Sep 2022 09:26 PM IST
सार
धोखाधड़ी व फ्रॉड के आरोप में बीते 9 महीने से जेल में बंद आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की राहत दी है। आरोपी ने बताया था एक जैसी धाराओं में उसे इलाहाबाद कोर्ट ने जमानत दे दी थी, पर मप्र हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
धोखाधड़ी व फ्रॉड के आरोप में निरुद्ध युवक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि संबंधित धाराओं के तहत उत्तर प्रदेश में भी उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज था। उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिल गया है। मप्र हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई तथा जस्टिस सीटी रविकुमार ने आवेदक को जमानत का लाभ प्रदान किया है।
बता दें कि रोहित उर्फ धाकू की तरफ से दायर एसएलपी में कहा गया था कि ग्रेनेडियर रेजीमेंट सेंटर में नकली नियुक्ति पत्र देकर लोगों के साथ धोखाधड़ी व फ्रॉड किए जाने का अपराध उसके तथा अन्य के खिलाफ जबलपुर के गोरखपुर थाने में दर्ज किया गया था। आवेदक गत 19 अक्टूबर 2021 से पुलिस अभिरक्षा में है और न्यायालय में चालान पेश हो गया है।
आवेदन में कहा गया था कि उक्त धाराओं के तहत उसके तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ अन्य प्रकरण उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे जमानत का लाभ मिल गया है। मप्र हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद पाया कि आवेदक पिछले 9 महीने से जेल में है। प्रकरण में सहआरोपियों को जमानत का लाभ मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के आधार पर आवेदक को जमानत का लाभ देने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता राजेश सिंह तथा अधिवक्ता जाबेर रजा ने पैरवी की।
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बता दें कि रोहित उर्फ धाकू की तरफ से दायर एसएलपी में कहा गया था कि ग्रेनेडियर रेजीमेंट सेंटर में नकली नियुक्ति पत्र देकर लोगों के साथ धोखाधड़ी व फ्रॉड किए जाने का अपराध उसके तथा अन्य के खिलाफ जबलपुर के गोरखपुर थाने में दर्ज किया गया था। आवेदक गत 19 अक्टूबर 2021 से पुलिस अभिरक्षा में है और न्यायालय में चालान पेश हो गया है।
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आवेदन में कहा गया था कि उक्त धाराओं के तहत उसके तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ अन्य प्रकरण उत्तर प्रदेश में दर्ज हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे जमानत का लाभ मिल गया है। मप्र हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद पाया कि आवेदक पिछले 9 महीने से जेल में है। प्रकरण में सहआरोपियों को जमानत का लाभ मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के आधार पर आवेदक को जमानत का लाभ देने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता राजेश सिंह तथा अधिवक्ता जाबेर रजा ने पैरवी की।
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