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MP High Court: अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान व्यक्तिगत कोष से अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए स्वतंत्र

Mon, 12 Aug 2024 04:07 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 12 Aug 2024 04:07 PM IST
सार

जबलपुर निवासी कौशल कुमार कुशवाहा की तरफ से याचिका दायर की गई थी। उसके पिता अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत थे। उनकी मौत के बाद उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

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MP High Court Grant-in-aid educational institutions free to give compassionate appointment from personal funds
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन ने अपने आदेश में कहा है कि अनुदान प्रदान शैक्षणिक संस्थान व्यक्तिगत कोष से अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए स्वतंत्र हैं। सरकार ऐसे कर्मचारी के लिए अनुदान राशि प्रदान नहीं करेगी।

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जबलपुर निवासी कौशल कुमार कुशवाहा की तरफ से याचिका दायर की गई थी। उसके पिता अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत थे। उनकी मौत के बाद उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। जिला शिक्षा अधिकारी ने सितंबर 2017 में जारी आदेश में कहा था कि अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए स्वतंत्र हैं। परंतु नियुक्ति कर्मचारी के लिए शासन द्वारा अनुदान प्रदान नहीं किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी।
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याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि राज्य सरकार ने निजी शैक्षणिक संस्थान में अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्देश जारी किए थे। सरकार की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि उक्त नियमों में संशोधन किया गया था, जिसको चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने संशोधित नियमों को निरस्त कर दिए थे। उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
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सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2000 से पहले के कर्मचारियों पर संशोधित नियम प्रभावी नहीं होने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद सरकार की तरफ से आदेश जारी किए गए थे कि अनुदान प्राप्त अशासकीय शालाओं में सेवानिवृत्ति तथा अन्य कारणों से रिक्त हुए पदों पर नवीन नियुक्तियां नहीं की गई। उक्त पद अमान्य करते हुए अनुदान प्रदान नहीं किया जाएगा। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है, सरकार ने डाइग कैडर के तहत निर्णय लिया है। एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया। 

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