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Jabalpur: डीएनए रिपोर्ट रिकॉर्ड में लेने के बाद अभियुक्त ने दर्ज नहीं किए बयान, कोर्ट ने दिये जांच के निर्देश

Wed, 25 Sep 2024 03:48 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 25 Sep 2024 03:48 PM IST
सार

MP: साल 2020 में एक महिला मजदूर ने गोंड के खिलाफ नाबालिग बेटी से रेप का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। दो साल पहले अनूपपुर की एडीजे कोर्ट ने बाबूलाल को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। इस आदेश को बाबूलाल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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Accused did not record statement after taking DNA report on record
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डीएनए रिपोर्ट रिकॉर्ड में लेने के बावजूद भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत बयान दर्ज नहीं किये जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस देव नारायण मिश्रा की युगलपीठ ने संचालक लोक अभियोजन को एडीओपी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिया है। युगलपीठ ने विशेष न्यायाधीश के खिलाफ का न्याय शास्त्र के खिलाफ कार्रवाई के आदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को दिये है।
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उमरिया निवासी बाबूलाल सिंह गौड की तरफ से पॉक्सो तथा बलात्कार के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि थाना प्रभारी पाली ने डीएनए रिपोर्ट 14 नवंबर 2022 को विशेष न्यायालय में प्रस्तुत की थी। विशेष न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए आदेश पत्र में भी उल्लेख किया था। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अभियोजन साक्ष्य के लिए 17 नवंबर 2022 की तारीख निर्धारित की गयी थी। इसके बाद 18 नवंबर तथा 28 नवंबर को अभियोजन साक्ष्य के लिए तारिख निर्धारित की गयी।
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इसके बाद 29 नवंबर को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के अंतर्गत अभियुक्त की जांच की गई तथा 30 नवंबर को पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात निर्णय पारित किया। एडीपीओ  बी.के. वर्मा ने डी.एन.ए. रिपोर्ट प्रदर्शित नहीं करने का निर्णय लिया। संबंधित न्यायाधीश ने डीएनए रिपोर्ट पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत अभियुक्त का बयान लेते समय उसके प्रश्न नहीं कर लापरवाही बरती। एकलपीठ ने सजा के आदेश को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि डीएनए रिपोर्ट पर अभियुक्त के बयान दर्ज कर नया फैसला पारित किया जाये। इसके लिए न्यायालय ने तीन माह की समय सीमा निर्धारित की है। युगलपीठ ने अपने आदेश में विशेष न्यायाधीश तथा एडीओपी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी जारी किये है।
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