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जबलपुर: वेटिंग में भी नहीं था नाम फिर भी कर दी नियुक्ति, हाईकोर्ट ने लगाई रोक, मामले में 28 जून को फिर सुनवाई
Fri, 13 May 2022 08:57 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 13 May 2022 08:57 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी नियुक्ति नहीं दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था जिसका प्रतीक्षा सूची में नाम तक नहीं था उसे नियुक्ति प्रदान की गई है। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने नियुक्ति पर रोक लगाते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 28 जून को निर्धारित की है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी नियुक्ति नहीं दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था जिसका प्रतीक्षा सूची में नाम तक नहीं था उसे नियुक्ति प्रदान की गई है। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने नियुक्ति पर रोक लगाते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 28 जून को निर्धारित की है
।
याचिकाकर्ता डॉ. सूर्या तिवारी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि विदिशा मेडिकल कॉलेज में अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद पर उसका चयन 15 फरवरी 2020 को हुआ था। उसका चयन सिलेक्शन कमेटी द्वारा किया गया था, जिसके प्रमुख संभागायुक्त भोपाल गुलशन वामरा थे। चयन के बावजूद भी उसे नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया था। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2022 को जारी अपने आदेश में कहा था कि 15 दिनों में याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। नियुक्ति में किसी प्रकार की कोई दिक्कत है तो उसके संबंध में याचिकाकर्ता को जानकारी दी जाए।
हाईकोर्ट के आदेश पालन नहीं होने के कारण अवमानना याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संभागायुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया था कि 4 मई 2020 को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर शुभांगी काले को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया है। जबकि उनका नाम सिलेक्शन लिस्ट की प्रतीक्षा सूची तक में नहीं था। याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए।
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याचिकाकर्ता डॉ. सूर्या तिवारी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि विदिशा मेडिकल कॉलेज में अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद पर उसका चयन 15 फरवरी 2020 को हुआ था। उसका चयन सिलेक्शन कमेटी द्वारा किया गया था, जिसके प्रमुख संभागायुक्त भोपाल गुलशन वामरा थे। चयन के बावजूद भी उसे नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया था। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2022 को जारी अपने आदेश में कहा था कि 15 दिनों में याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। नियुक्ति में किसी प्रकार की कोई दिक्कत है तो उसके संबंध में याचिकाकर्ता को जानकारी दी जाए।
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हाईकोर्ट के आदेश पालन नहीं होने के कारण अवमानना याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संभागायुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया था कि 4 मई 2020 को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर शुभांगी काले को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया है। जबकि उनका नाम सिलेक्शन लिस्ट की प्रतीक्षा सूची तक में नहीं था। याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए।
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