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जबलपुर: फ्लाय ओवरब्रिज के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में अगली सुनवाई 21 जनवरी को, बिना सहमति कार्रवाई पर रोक बरकरार
Wed, 12 Jan 2022 08:09 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 12 Jan 2022 08:09 PM IST
सार
फ्लाय ओवरब्रिज के लिए नगर निगम द्वारा मनमाने तरीके से भूमि-अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर की गई हैं। युगलपीठ ने स्थगन आदेश को बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित की है।
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Jabalpur High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
फ्लाय ओवरब्रिज के लिए नगर निगम द्वारा मनमाने तरीके से भूमि-अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस पी कौरव की युगलपीठ को बताया गया कि आपसी सहमति के लिए कलेक्टर द्वारा कमेटी प्रकरणों की सुनवाई कर रही है। युगलपीठ ने स्थगन आदेश को बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित की है।
हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएस झा, उनके अधिवक्ता पुत्र केएस झा तथा सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीष पीपी नावलेकर, पूर्व महाधिक्ता ए अग्रवाल सहित दायर लगभग तीन दर्जन याचिकाओं में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम द्वारा शहर के अंदर फ्लाय ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। पं. लज्जा शंकर मार्ग में फ्लाय ओवरब्रिज जहां उतारा जा रहा है उक्त मार्ग की चौड़ाई 80 फीट से अधिक निर्धारित की गई है, जो मास्टर प्लान से अधिक है। इसके लिए लोगों की व्यक्तिगत भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके अलावा दमोह नाका से मदन महल मार्ग में भी लोगों की भूमि का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि कितनी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि सरकार एक तरफ न्यायालय में आपसी समझौते के तहत कार्रवाई की बात कहती है वहीं दूसरी तरफ दूसरी तरफ जबरन तोड़फोड़ करने का लगातार प्रयास जारी है। न्यायालय ने बिना सहमति किसी भी प्रकार की तोड़फोड करने पर रोक लगाते हुए सरकार व नगर निगम को जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
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याचिकाओं पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि आपसी सहमति स्थापित करने कलेक्टर ने एक कमेटी का गठन किया है। जो संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सुनने के बाद निर्णय लेगी। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि आपसी सहमति के लिए कलेक्टर द्वारा कमेटी प्रकरणों की सुनवाई कर रही है। युगलपीठ ने स्थगन आदेश को बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित की है। हाईकोर्ट याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंषुमान सिंह ने पैरवी की।
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हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएस झा, उनके अधिवक्ता पुत्र केएस झा तथा सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीष पीपी नावलेकर, पूर्व महाधिक्ता ए अग्रवाल सहित दायर लगभग तीन दर्जन याचिकाओं में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम द्वारा शहर के अंदर फ्लाय ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। पं. लज्जा शंकर मार्ग में फ्लाय ओवरब्रिज जहां उतारा जा रहा है उक्त मार्ग की चौड़ाई 80 फीट से अधिक निर्धारित की गई है, जो मास्टर प्लान से अधिक है। इसके लिए लोगों की व्यक्तिगत भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके अलावा दमोह नाका से मदन महल मार्ग में भी लोगों की भूमि का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है।
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याचिका में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि कितनी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि सरकार एक तरफ न्यायालय में आपसी समझौते के तहत कार्रवाई की बात कहती है वहीं दूसरी तरफ दूसरी तरफ जबरन तोड़फोड़ करने का लगातार प्रयास जारी है। न्यायालय ने बिना सहमति किसी भी प्रकार की तोड़फोड करने पर रोक लगाते हुए सरकार व नगर निगम को जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
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याचिकाओं पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि आपसी सहमति स्थापित करने कलेक्टर ने एक कमेटी का गठन किया है। जो संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सुनने के बाद निर्णय लेगी। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि आपसी सहमति के लिए कलेक्टर द्वारा कमेटी प्रकरणों की सुनवाई कर रही है। युगलपीठ ने स्थगन आदेश को बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित की है। हाईकोर्ट याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंषुमान सिंह ने पैरवी की।
