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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur: High court strict if the order is not followed, ordered the commissioner to be present if the order is not followed in two weeks

जबलपुर: आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट सख्त, दो सप्ताह में आदेश का परिपालन नहीं होने पर आयुक्त को उपस्थित होने के आदेश दिए

Sun, 30 Jan 2022 02:09 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sun, 30 Jan 2022 02:09 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश का परिपालन न होने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश का परिपालन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। आदेश का पालन न होने पर आयुक्त महिला एवं बाल विकास को उपस्थिति होने के आदेश दिए हैं।

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Jabalpur: High court strict if the order is not followed, ordered the commissioner to be present if the order is not followed in two weeks
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश का परिपालन नहीं किए जाने को न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस पी के कौरव ने सरकार के आग्रह पर आदेश परिपालन के लिए दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। आदेश का परिपालन नहीं करने पर एकलपीठ ने आयुक्त महिला एवं बाल विकास को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए हैं।
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याचिकाकर्ता फूलवर्ती नामदेव, देवरानी सेन और सावित्री सोलंकी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वे महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थीं। 1998 को उससे कनिष्ठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर के रूप में पदोन्नत कर दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 2010 में उनके पक्ष में आदेश पारित किया था। जिसके खिलाफ सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की शरण ली थी। सर्वोच्च न्यायाल ने भी उनके पक्ष में आदेश पारित किया था।
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सरकार द्वारा आदेश का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गयी थी। जिसकी सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि उन्हें 1998 से सुपरवाइजर के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है। दायर याचिका में कहा गया था कि उन्हें पदोन्नत तो कर दिया गया परंतु नो वर्क- नो पेमेंट के आधार पर वेतन सहित अन्य लाभ का भुगतान नहीं किया गया। पूर्व में न्यायालय ने आदेश जारी किए थे, कि वेतन संबंधित अन्य लाभ के संबंध में सरकार 6 सप्ताह में याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर निर्णय ले। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि अभ्यावेदन प्रस्तुत किए सवा साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
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