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जबलपुर हाईकोर्ट की दो टूक: जमीन ली है तो मुआवजा तो देना ही होगा, सरकार को जवाब पेश करने दी मोहलत

Thu, 14 Apr 2022 12:25 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 14 Apr 2022 12:25 PM IST
सार

बिरला ग्रुप द्वारा सीमेंट फैक्ट्री के लिए किसानों की अधिग्रहीत की गई जमीन पर उन्हें उचित मुआवजा न मिलने व नौकरी न दिए जाने के मामले को हाईकोर्ट ने सख्ती से लिया।

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Jabalpur High Court: If the land is taken then compensation will have to be given, the government has been given time to present the answer
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सतना जिले में बिरला ग्रुप द्वारा सीमेंट फैक्ट्री के लिए किसानों की अधिग्रहीत की गई जमीन पर उन्हें उचित मुआवजा न मिलने व नौकरी न दिए जाने के मामले को हाईकोर्ट ने सख्ती से लिया। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ के समक्ष सरकार की ओर से कहा गया कि जमीन का अधिग्रहण बहुत पहले हो चुका है, जिस पर न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि जनसुनवाई के दौरान जमीन के बदले उचित मुआवजा व नौकरी दिए जाने का आश्वासन दिया गया था तो फिर क्यों नहीं दिया जा रहा है, जिस पर जवाब पेश करने सरकार की ओर से समय की राहत चाही गई। कोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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अखिल भारतीय किसान सभा जिला परिषद सतना के सचिव रामसरोज कुशवाहा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि बिरला ग्रुप की रिलायंस सीमेंट कॉम प्रालि (आरसीसीपीएल) बिरला ग्रुप ने सीमेंट फैक्ट्री के लिए सैकड़ों किसानों की जमीन अधिग्रहीत की, लेकिन उनकी सिंचित जमीन की जगह असिंचित जमीन का मुआवजा दिया गया। इतना ही नहीं उन्हें नौकरी दिए जाने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कांट्रेक्ट के आधार पर नौकरी दी गई और जिनमें से कई लोगों को दो तीन माह में ही नौकरी से अलग कर दिया।
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आरोप है कि किसानों के साथ विश्वासघात कर उनकी सिंचित जमीनें अधिग्रहीत की गई हैं, जो कि अवैधानिक है। मामले में सचिव व उप सचिव इंडस्ट्रियल पॉलिसी इंवेस्टमेंट प्रोमोशन व सतना कलेक्टर सहित आरसीसीपीएल को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे। मामले में आगे हुई सुनवाई पर न्यायालय ने उक्त निर्देश देते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पीसी चांडक व उत्तम माहेश्वरी ने पक्ष रखा।
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