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जबलपुर: हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता को न्यायिक कर्मचारियों के वेतनमान मामले में कमेटी गठित करने का दिया निर्देश

Mon, 24 Jan 2022 09:45 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 24 Jan 2022 09:45 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की दो अनुशंसाओं के बाद भी हाईकोर्ट के कर्मचारियों को शेट्टी पे कमीशन अनुसार न्यायिक वेतनमान नहीं दिये जाने को हाईकोर्ट ने न्यायालय की अवहेलना माना और महाधिवक्ता को दिशा-निर्देश प्राप्त कर न्यायालय को अवगत कराने निर्देश दिए।

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Jabalpur: High Court directed the Advocate General to constitute a committee in the matter of pay scale of judicial employees
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट के कर्मचारियों को शेट्टी पे कमीशन की अनुशंसा अनुसार न्यायिक वेतनमान नहीं दिये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस अंजुली पालो ने हाईकोर्ट की दो अनुशंसा के बावजूद आदेश का परिपालन नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। युगलपीठ ने महाधिवक्ता को निर्देशित किया है कि मामले के समाधान के लिए हाईकोर्ट के रजिस्टार जनरल तथा वित्त व विधि विभाग के प्रमुख सचिव की कमेटी गठित करने के संबंध में सरकार से दिशा-निर्देश प्राप्त कर न्यायालय को अवगत कराएं। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धरित की है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा सहित अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने 28 अप्रैल 2017 को उनकी रिट याचिका स्वीकार करते हुए सरकार को शेट्टी पे कमीशन की अनुशंसाओं का लाभ देने निर्देश दिये थे। इस आदेश के बाद भी याचिकाकर्ताओं को लाभ नहीं दिये जाने के खिलाफ अवमानना याचिका 2018 में दायर की गयी थी। याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पाया कि उच्च न्यायालय द्वारा 28 अप्रैल 2017 को पारित फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अपील को खारिज कर दिया था।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को आदेश के परिपालन के संबंध में रिपोर्ट पेश करने निर्देश जारी किये थे। परिपालन रिपोर्ट पेश नहीं करने पर व्यक्तिगत उपस्थिति होने का आदेश भी जारी किया था। मुख्य सचिव इकबाल सिंह की तरफ से पेश की गयी परिपालन रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायिक कर्मचारियों को सरकार अनुशंसा अनुसार वेतनमान नहीं दे सकती है। हाईकोर्ट कर्मचारियों को अनुशंसा अनुसार वेतनमान दिये जाने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा गया था। कैबिनेट ने इस आधार पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि न्यायिक कर्मचारियों को अनुशंसा अनुसार वेतनमान दिया जाता है, तो अन्य विभाग के कर्मचारियों के साथ पक्षपात होगा। दूसरे विभाग के कर्मचारी भी न्यायिक कर्मचारियों के समान वेतन की मांग करेंगे। परिपालन रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद युगलपीठ ने पाया था कि यह उच्च न्यायालय की अवहेलना की श्रेणी में आता है। जिसके बाद महाधिवक्ता ने परिपालन रिपोर्ट वापस लेने का आग्रह किया। युगलपीठ ने महाधिवक्ता के उक्त आग्रह को स्वीकार कर लिया था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के बाद युगलपीठ ने कमेटी गठित करने का निर्देश जारी किया। 
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