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जबलपुर: अब अगली सुनवाई 12 जनवरी को, फ्लाय ओवरब्रिज के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लगीं याचिकाओं का मामला
Wed, 05 Jan 2022 12:38 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 05 Jan 2022 12:38 PM IST
सार
जबलपुर में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए नगर निगम द्वारा मनमाने तरीके से भूमि-अधिग्रहण किए जाने पर मंगलवार को सुनवाई की गई। युगलपीठ ने बिना सहमति तोड़फोड़ पर रोक के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिकाओं पर अगली सुनवाई 12 जनवरी को निर्धारित की है।
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Jabalpur: लगभग तीन दर्जन याचिकाओं में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती दी गई है।
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
जबलपुर में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए नगर निगम द्वारा मनमाने तरीके से भूमि-अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं पर मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस पी कौरव की युगलपीठ को सरकार व नगर निगम की तरफ से बताया गया कि आपसी सहमति के लिए कलेक्टर की ओर से कमेटी गठित की गई है। कमेटी सभी प्रकरणों की सुनवाई कर कोई रास्ता निकालेगी। युगलपीठ ने बिना सहमति तोड़फोड़ पर रोक के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिकाओं पर अगली सुनवाई 12 जनवरी को निर्धारित की है।
हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएस झा, उनके अधिवक्ता पुत्र के एस झा तथा सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी पी नावलेकर, पूर्व महाधिक्ता ए अग्रवाल सहित अन्य की ओर से दायर लगभग तीन दर्जन याचिकाओं में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम द्वारा शहर के अंदर फ्लाय ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। पं. लज्जा शंकर मार्ग में फ्लाय ओवरब्रिज जहां उतारा जा रहा है, उक्त मार्ग की चौड़ाई 80 फीट से अधिक तय की गई है, जो मास्टर प्लान से अधिक है। इसके लिए लोगों की व्यक्तिगत भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके अलावा दमोह नाका से मदन महल मार्ग में भी लोगों की भूमि का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है।
नोटिस दिए, पर नहीं बताया कितनी जमीन लेंगे
याचिका में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि कितनी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि सरकार एक तरफ न्यायालय में आपसी समझौते के तहत कार्यवाही की बात कहती है, वहीं दूसरी तरफ दूसरी तरफ जबरन तोड़फोड़ करने का लगातार प्रयास जारी है। इसके बाद न्यायालय ने बिना सहमति किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ करने पर रोक लगाते हुए सरकार व नगर निगम को जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए थे। याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उक्त जानकारी पेश की गई। जिसके बाद युगलपीठ ने स्थगन को बरकरार रखते हुए उक्त निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंषुमान सिंह ने पैरवी की।
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हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएस झा, उनके अधिवक्ता पुत्र के एस झा तथा सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी पी नावलेकर, पूर्व महाधिक्ता ए अग्रवाल सहित अन्य की ओर से दायर लगभग तीन दर्जन याचिकाओं में फ्लाय ओवरब्रिज के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि नगर निगम द्वारा शहर के अंदर फ्लाय ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। पं. लज्जा शंकर मार्ग में फ्लाय ओवरब्रिज जहां उतारा जा रहा है, उक्त मार्ग की चौड़ाई 80 फीट से अधिक तय की गई है, जो मास्टर प्लान से अधिक है। इसके लिए लोगों की व्यक्तिगत भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके अलावा दमोह नाका से मदन महल मार्ग में भी लोगों की भूमि का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है।
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नोटिस दिए, पर नहीं बताया कितनी जमीन लेंगे
याचिका में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि कितनी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि सरकार एक तरफ न्यायालय में आपसी समझौते के तहत कार्यवाही की बात कहती है, वहीं दूसरी तरफ दूसरी तरफ जबरन तोड़फोड़ करने का लगातार प्रयास जारी है। इसके बाद न्यायालय ने बिना सहमति किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ करने पर रोक लगाते हुए सरकार व नगर निगम को जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए थे। याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उक्त जानकारी पेश की गई। जिसके बाद युगलपीठ ने स्थगन को बरकरार रखते हुए उक्त निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंषुमान सिंह ने पैरवी की।
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