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जबलपुर: राजस्व बढ़ाने के लिए बेची जा रही सरकारी सम्पत्तियां, जवाब पेश करने सरकार को मिली मोहलत
Wed, 23 Feb 2022 09:10 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 23 Feb 2022 09:10 PM IST
सार
जबलपुर, भोपाल व इंदौर सहित अन्य स्थानों में राज्य सड़क परिवहन निगम की संपत्तियों को बेचने की प्रकिया शुरू कर दी गई है। सरकारी संपत्ति बेचने की बजाए उनका दूसरा उपयोग कर रेवेन्यू बढ़ाया जा सकता है।
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Jabalpur High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व बढ़ाने के लिए सरकारी संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एमएस भट्टी की युगलपीठ से सरकार की तरफ से जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि मप्र सरकार क्रय नियम में संशोधन कर सरकारी प्रॉपर्टी का विक्रय करने जा रही है। जिसके लिए जबलपुर, भोपाल व इंदौर सहित अन्य स्थानों में राज्य सड़क परिवहन निगम की संपत्तियों को बेचने की प्रकिया शुरू कर दी गई है। सरकारी संपत्ति बेचने की बजाए उनका दूसरा उपयोग कर रेवेन्यू बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में ऐसे कई कार्यालय हैं जो कि सरकार ने लाखों रुपये किराए पर लिए हैं, उक्त सरकारी संपत्ति पर खुद के सरकारी कार्यालयों का निर्माण किया जा सकता है।
इतना ही नहीं उक्त संपत्ति को लीज पर दिया जा सकता है, जिससे सरकार की साख बची रहेगी और उस पर लोन भी लिया जा सकता है। याचिका में राहत चाही गई है कि सरकारी संपत्ति बेचने से सरकार को रोका जाए। याचिका में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग व पब्लिक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट को पक्षकार बनाया गया है। याचिका की सुनवाई के बाद सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि मप्र सरकार क्रय नियम में संशोधन कर सरकारी प्रॉपर्टी का विक्रय करने जा रही है। जिसके लिए जबलपुर, भोपाल व इंदौर सहित अन्य स्थानों में राज्य सड़क परिवहन निगम की संपत्तियों को बेचने की प्रकिया शुरू कर दी गई है। सरकारी संपत्ति बेचने की बजाए उनका दूसरा उपयोग कर रेवेन्यू बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में ऐसे कई कार्यालय हैं जो कि सरकार ने लाखों रुपये किराए पर लिए हैं, उक्त सरकारी संपत्ति पर खुद के सरकारी कार्यालयों का निर्माण किया जा सकता है।
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इतना ही नहीं उक्त संपत्ति को लीज पर दिया जा सकता है, जिससे सरकार की साख बची रहेगी और उस पर लोन भी लिया जा सकता है। याचिका में राहत चाही गई है कि सरकारी संपत्ति बेचने से सरकार को रोका जाए। याचिका में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग व पब्लिक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट को पक्षकार बनाया गया है। याचिका की सुनवाई के बाद सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
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