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जबलपुर: न्यायिक कर्मचारियों को सरकार नहीं दे सकती अनुशंसा अनुसार वेतनमान, हाईकोर्ट ने माना अवमानना तो सरकार ने वापस ली परिपालन रिपोर्ट

Tue, 11 Jan 2022 02:41 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 11 Jan 2022 02:41 PM IST
सार

हाईकोर्ट के कर्मचारियों को शेटटी पे-कमीशन की अनुशंसा अनुसार न्यायिक वेतनमान नहीं दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। इस पर सोमवार को सुनवाई की गई।
 

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Jabalpur: Government cannot give salary scale to judicial employees as recommended, High Court admits contempt, then government withdraws compliance report
- फोटो : Social Media

विस्तार

हाईकोर्ट के कर्मचारियों को शेटटी पे-कमीशन की अनुशंसा अनुसार न्यायिक वेतनमान नहीं दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। इस पर सोमवार को सुनवाई की गई।
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सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव इकबाल सिंह की तरफ से पेश परिपालन रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायिक कर्मचारियों को सरकार अनुशंसा अनुसार वेतनमान नहीं दे सकती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस अंजुली पालो ने इसे न्यायालय की अवमानना माना। जिसके बाद सरकार ने पेश परिपालन रिपोर्ट वापस लेने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने आदेश का परिपालन करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 24 जनवरी को निर्धारित की है।
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जानकारी के अनुसार मप्र हाईकोर्ट में कार्यरत चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा सहित अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने 28 अप्रैल 2017 को उनकी याचिका स्वीकार करते हुए सरकार को शेट्टी पे कमीशन की अनुशंसाओं का लाभ देने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद भी याचिकाकर्ताओं का उक्त लाभ नहीं दिए जाने के खिलाफ उक्त अवमानना याचिका 2018 में दायर की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट भी खारिज कर चुकी सरकार की अपील
याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि उच्च न्यायालय द्वारा 28 अप्रैल 2017 को पारित फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अपील को खारिज कर दिया था। आदेश के परिपालन के लिए सरकार को कई अवसर दिए गए थे, परंतु परिपालन नहीं किया गया। युगलपीठ ने आदेश का परिपालन नहीं करने पर प्रमुख सचिव विधि विभाग, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग तथा प्रमुख सचिव वित्त विभाग व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में रहने की चेतावनी दी थी।

दूसरे कर्मचारियों के साथ पक्षपात होने की कही बात
याचिका पर हुई पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को आदेश के परिपालन के संबंध में रिपोर्ट पेश करने निर्देश जारी किए थे। परिपालन रिपोर्ट पेश नहीं करने पर व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश दिए थे। सरकार की तरफ से पेश की गई परिपालन रिपोर्ट में कहा गया था कि हाईकोर्ट कर्मचारियों को अनुशंसा अनुसार वेतनमान दिए जाने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा गया था। कैबिनेट ने इस आधार पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि न्यायिक कर्मचारियों को अनुशंसा अनुसार वेतनमान दिया जाता है तो अन्य विभाग के कर्मचारी के साथ पक्षपात होगा। दूसरे विभाग के कर्मचारी भी न्यायिक कर्मचारियों के सामान्य वेतन की मांग करेंगे।


परिपालन रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद युगलपीठ ने पाया कि यह उच्च न्यायालय की अवहेलना की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया है तो उसका परिपालन होना चाहिए। जिसके बाद महाधिवक्ता ने परिपालन रिपोर्ट वापस लेने का आग्रह किया। जिसके बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता नमन नागरथ ने पैरवी की। 
 
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