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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Interview: Chhindwara DM Saurabh Suman said that the state's orange will be known as 'MP Satpura Orange', will also be sold on Amazon

इंटरव्यू: छिंदवाड़ा कलेक्टर की पहल- 'नागपुरी गोले' को भूल जाओगे, अब आएगा 'सतपुड़ा ऑरेंज', अमेजन पर भी बिकेगा

Wed, 27 Apr 2022 12:24 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 27 Apr 2022 12:24 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में उत्पादित संतरे भी नागपुरी संतरों के तौर पर बिकते हैं। अब छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने प्रदेश में उत्पादित संतरों के लिए एमपी सतपुड़ा ऑरेंज नाम से बेचने की तैयारी कर ली है। 

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Interview: Chhindwara DM Saurabh Suman said that the state's orange will be known as 'MP Satpura Orange', will also be sold on Amazon
छिंदवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संतरों का नाम लेते ही नागपुर और नागपुरी गोले शब्द जेहन में आते हैं। यहां तक कि मध्य प्रदेश के बैतूल और छिंदवाड़ा में उत्पादित संतरे भी नागपुरी ब्रांड से बिकते हैं। पर, अब स्थिति बदलने वाली है। छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने प्रदेश में उत्पादित संतरों को एमपी सतपुड़ा ऑरेंज नाम से बेचने की तैयारी की है। इन संतरों पर उनकी नस्ल और उसका उत्पादन करने वाले किसान की पूरी जानकारी क्यूआर कोड को स्कैन कर पता चल जाएगी। छिंदवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन की इस पहल पर हमने उनसे बातचीत की। उनसे जाना कि वे क्या और कैसे करने जा रहे हैं।  पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंशः
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छिंदवाड़ा और बैतूल के संतरों को अलग नाम की जरूरत क्यों है? यह नाम कैसे आया? 
सौरभ सुमन:
अभी संतरे का जीआई टैग नागपुरी नाम से मिला हुआ है। हकीकत यह है कि ज्यादातर संतरा छिंदवाड़ा और बैतूल जिले में हो रहा है। यह दोनों ही जिले सतपुड़ा पहाड़ी पर बसे हैं। मध्य प्रदेश की पहचान होनी चाहिए। जहां तक छिंदवाड़ा जिले की बात है तो पांढुर्णा, सौंसर, बिछुआ और अन्य विकासखंडों में 25 हजार हैक्टेयर पर संतरों की खेती हो रही है। करीब 4.5 लाख टन संतरों का उत्पादन इस इलाके में होता है। 60 से 70 प्रतिशत उत्पादन तो सीधे-सीधे नागपुरी व्यापारी खरीद लेते है। यह संतरा भारत के अन्य राज्यों और बांग्लादेश तक जाता है।  
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इसके लिए हमने सतपुड़ा ऑरेंज की ब्रांडिंग की है। यदि छिंदवाड़ा जिले का है तो उसके नीचे छिंदवाड़ा नाम लिखा जाएगा। दूसरे जिले भी अपना नाम लिख सकेंगे। अभी इसका ट्रेडमार्क लेने की तैयारी चल रही है। संतरे के स्टिकर पर हर किसान का अपना क्यूआर कोड होगा। उस कोड को मोबाइल से स्कैन करेंगे तो उसमें किसान की पूरी जानकारी, उसके खेत की जानकारी, संतरे की किस्म की जानकारी का पेज खुल जाएगा। जहां किसान का वीडियो होगा। इसका उद्देश्य किसान को जनता से सीधे जोड़ना है। इसका ट्रायल करके देख लिया है। सितंबर-अक्टूबर के अगले सीजन से लागू कर देंगे। 
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सिर्फ नाम बदला है या और भी कुछ? इसे बेचेंगे कहां?
सौरभ सुमन:
हम फेडरेशन तैयार कर रहे हैं, जो जिले में ही पैकेजिंग करेंगे और सीधे विक्रय करेंगे। इसके अलावा विपणन संघ ई-कॉमर्स पर भी अपना संतरा ले जाने की योजना बना रहे हैं। अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म पर भी ऑरेंज सीधे बिकेंगे। 

सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में छिंदवाड़ा पहले नंबर पर है? कैसे संभव हो पा रहा है।
सौरभ सुमनः हमने दो श्रेणियों को विभागों में बांट दिया है। इसमें कमजोर विभाग को ज्यादा ज्यादा फॉलोअप किया जाता है। अच्छा करने वाले विभागों को गाइडेंस दिया जाता है। साथ ही शिकायतों के निराकरण के लिए डिस्ट्रिक्ट स्तर पर कॉल सेंटर बना दिया है। यहां पर शिकायतकर्ता से बात कर शिकायत समझी जाती है। यहीं पर कई शिकायतों का निराकरण तुरंत हो जाता है।  

सवाल- जिला जनजाति बाहुल है। उनकी बेहतरी के लिए क्या कदम उठाए जा रहे है?
सौरभ सुमनः हमने आदिवासी क्षेत्रों के लिए पोल्ट्री प्रोजेक्ट शुरू किया है। तामिया में भारिया जनजाती रहती है। यहां कंपनी से टाई-अप कर सर्वे कराया है। इस जनजाति के एक हजार परिवारों को शेड बनाकर देंगे। मनरेगा योजना के तहत 500 पोल्ट्री फॉर्म के शेड बनाना शुरू भी कर दिया गया है। एक हजार शेड शुरू होने पर 22 से 25 करोड़ रुपये का टर्न ओवर शुरू हो जएगा। इसमें महिलाओं को आगे रखा है। हमारे अनुमान के अनुसार प्रति परिवार सालाना 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय शुरू हो जाएगी। 

आपके यहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना में कितने मकान बन गए हैं?
सौरभ सुमनः पीएम आवास योजना में प्रदेश के टॉप 5 जिलों में छिंदवाड़ा का नाम आता है। योजना के तहत 88% आवास पूर्ण हो गए हैं।  

मुख्यमंत्री विवाह योजना को लेकर हाल ही विवाद सामने आया था। उसमें क्या निकल कर सामने आया?
सौरभ सुमनः कुछ जनप्रतिनिधियों ने योजना की गाइडलाइन आने से पहले खुद ही आयोजन कर दिया। उनको समझाया गया। अब सरकार की तरफ से गाइडलाइन भी आ गई और पोर्टल भी खुल गया। प्रक्रिया का पालन करने पर ही सरकार की तरफ से राशि मिलती है। 


छिंदवाड़ा बॉर्डर पर है। कोरोना संक्रमण फिर बढ़ रहा है। आपकी क्या तैयारी है?
सौरभ सुमनः वैक्सीनेशन अच्छा हुआ है। अभी चल भी रहा है। बॉर्डर मैनेजमेंट पर हमारी कार्ययोजना बनी हुई है। फील्ड लेवल पर भी हमारी तैयारी है। इसमें जनता के सहयोग से संक्रमण को रोका जाता है। छिंदवाड़ा के जनभागीदारी मॉडल को पूरे प्रदेश ने अपनाया था। 
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