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World Turtle Day: कछुए भगवान विष्णु का कच्छप अवतार, सुख-समृद्धि देते हैं, पर घर में रखना अपराध; इनकी खूब मांग
Fri, 23 May 2025 10:54 AM IST
उदित दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Fri, 23 May 2025 10:54 AM IST
सार
अमेरिकन टॉर्टोइज रेस्क्यू द्वारा वर्ष 2000 से प्रति वर्ष 23 मई को कछुआ दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य कछुओं की प्रजातियों के प्रति जागरूकता और उनका संरक्षण है।
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क्यों मनाया जाता है विश्व कछुआ दिवस।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कछुए का अस्तित्व सृष्टि के निर्माण के वक्त से है। कछुए की आयु सबसे अधिक होती है। ऐसा माना जाता है कि कुछ कछुए करीब 250 वर्ष से भी अधिक जिंदा रह सकते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने कच्छप (कछुए का) अवतार लिया था। बचपन में स्कूल में कछुए और खरगोश की कहानी हमें आज भी स्मरण है। कछुए के अलावा हमारी कई नदियों के वाहन जल जीवी प्राणी ही हैं, जैसे गंगा और नर्मदा का वाहन मगरमच्छ है। इससे जाहिर होता है कि जीव-जंतुओं को बचाने के लिए हमारे धर्म ग्रंथों में धार्मिक मान्यताओं को जोड़ गया है।
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कब से मनाया जाता है कछुआ दिवस
अमेरिकन टॉर्टोइज रेस्क्यू द्वारा वर्ष 2000 से प्रति वर्ष 23 मई को कछुआ दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य कछुओं की प्रजातियों के प्रति जागरूकता और उनका संरक्षण है। हमारे देवालयों में कई स्थानों पर इन्हें पूजा जाता है। यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। इसलिए हम कछुए को वर्षों से पूजते और उन्हें संरक्षण देते हैं।
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खुशहाली की मान्यता, पर है अपराध
धार्मिक मान्यता है कि कछुए को घर में रखने से सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। लोग घरों में कांच के छोटे-छोटे पात्रों में जिंदा कछुए रखते हैं। देश में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसार जिंदा कछुओं को घर में पालना और इनका विक्रय करना अपराध है, फिर भी चोरी छिपे कई लोगों के घर में कछुए देखने को मिल जाते हैं।
बाजार में नहीं मिला कछुआ
प्रतिनिधि ने इंदौर नगर निगम मुख्यालय के समीप पशु पक्षियों के बाजार में कछुआ खरीदने के लिए तलाश किया तो किसी के पास कछुआ उपलब्ध नहीं था। दुकानदारों का कहना था कि कछुआ नहीं मिल सकता।
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चांदी, कांच या धातु का कछुआ रख सकते हैं
पंडित भूपेंद्र तिवारी का कहना है कि कछुए का घर में होना सुख और समृद्धि का सूचक है। यह कांच या धातु का हो सकता है। चांदी, कांच और अन्य धातुओं के कछुए बाजार में उपलब्ध हैं। इंदौर के जेल रोड पर नॉवेल्टी मार्केट में सजावटी कछुए कांच में कई आकारों में उपलब्ध हैं। इसी प्रकार बर्तन बाजार में तांबे और पीतल के कछुए सभी आकारों में मिल जाते हैं। सराफे में चांदी और अष्ट धातु के कछुए मिल जाते हैं।
चांदी और अष्ट धातु के कछुओं की मांग बढ़ी
सराफा व्यापारी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष निर्मल वर्मा का कहना है कि आजकल चांदी और अष्ट धातु के कछुओं की मांग बनी रहती है। लोग घरों में अपने सजावटी कछुए पूजा में रखते हैं। इनकी कीमत वजन के अनुसार है। चांदी के छोटे कछुए करीब डेढ़ हजार रुपये से लेकर वजन के अनुसार कीमत पर सराफा बाजार में उपलब्ध हैं।
