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विश्व अस्थमा दिवस आज: बढ़ता वायु प्रदूषण बढ़ा रहा श्वास रोगियों की मुसीबत, इंदौर में तीन लाख मरीज

Tue, 05 May 2026 09:05 AM IST
कमलेश सेन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: कमलेश सेन Updated Tue, 05 May 2026 09:05 AM IST
सार

विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर इंदौर में बढ़ते वायु प्रदूषण और इसके स्वास्थ्य पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है। शहर में करीब ढाई से तीन लाख अस्थमा मरीज बताए जा रहे हैं। वाहनों की भारी संख्या, निर्माण कार्य और पराली जलाने जैसी वजहों से प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।

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स्वच्छ शहर इंदौर में प्रदूषण से बढ़े अस्थमा के मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे स्वच्छ शहर होने का तमगा इंदौर को प्राप्त है, चाहे आबादी हो, क्षेत्रफल हो या वाहनों की संख्या, शहर सब में अव्वल है। लेकिन इसका दुष्प्रभाव भी शहर की जनता को भोगना पड़ता है। इंदौर में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण श्वास रोगियों की मुसीबत भी बढ़ रही है। वाहनों के धुएं और सड़कों की बार-बार होने वाली खुदाई के अलावा चल रहे निर्माण कार्यों, जिनमें ब्रिज और मेट्रो लाइन के कार्य शामिल हैं, भी वायु प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। इस कारण भी अस्थमा के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार इंदौर में ढाई से तीन लाख अस्थमा रोगी हैं। 
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32 लाख से ज्यादा वाहन

इंदौर के क्षेत्रीय परिवहन विभाग में 32.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं, जिसमें करीब 40 प्रतिशत दो पहिया वाहन हैं। कारों की संख्या भी करीब साढ़े तीन लाख है। स्कूल बसें, भारी वाहन और अन्य छोटे मालवाहक वाहन अलग हैं। शहर स्वच्छता में देश में अपना परचम लहरा रहा है पर प्रदूषण के साथ वायु प्रदूषण में लगातार होती वृद्धि हो रही है। 
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पराली जलाने में भी अव्वल

पिछले  वर्ष अप्रैल माह में इंदौर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) इंडेक्स 236 के खतरनाक स्तर पर दर्ज किया गया था। खेतों में गेहूं की फसल लेने के बाद जलाई जाने वाली पराली भी वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। वर्ष 2025 में पराली जलाने में मध्य प्रदेश देश में अव्वल था। इंदौर को  स्वच्छता के साथ धूल, धुएं और प्रदूषण से भी बचाना है और वायु गुणवत्ता की श्रेणी में भी अव्वल लाना है, ताकि सांस और फेफड़ों से जुडी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि नहीं हो। 
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क्या है अस्थमा रोग

अस्थमा श्वास नली में आने वाली सूजन है। इसमें सामान्य व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, सांस फूलना, चलने में हाफनी आना, सीने में जकड़न, खांसी और एलर्जी होती है। इन लक्षणों के कारण मरीज असहज महसूस करता है, अस्थमा में सांस लेने की कठिनाई के साथ, फेफड़ों में बलगम जमाव और सीने में जकड़न के अलावा सांस फूलने  जैसी तकलीफ होती है। सांस की तकलीफ से शीघ्र लाभ के लिए इसके मरीजों को इन्हेलर से दवाएं लेनी होती हैं।

आयरलैंड में ठंड के बाद भी नहीं लेना पड़ी अस्थमा की दवा

इंदौर के महू नाका क्षेत्र की निवासी संगीता वर्मा लंबे समय से अस्थमा से पीड़ित है। उन्हें रोज दवा लेनी होती थी। हाल ही में वे तीन महीने आयरलैंड में अपने बेटे के पास रहीं। वहां अधिक ठंड होने और मौसम के परिवर्तन के कारण अस्थमा की दवा साथ ले गई थीं, परंतु उन्हें एक भी दिन अस्थमा की दवा नहीं लेनी पड़ी। उनका कहना है कि वहां  वायु प्रदूषण बिलकुल नहीं था। ठंडा मौसम जरूर था। जाहिर है कि अस्थमा की मुख्य वजह वायु प्रदूषण है।

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अब बच्चे भी हो रहे अस्थमा के शिकार : डॉ. भार्गव

प्रसिद्ध श्वसन और छाती रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सलिल भार्गव का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण, फास्ट फूड के सेवन और जीवन शैली में बदलाव से अस्थमा के मरीजों में वृद्धि हो रही है। इसके लिए वायु प्रदूषण भी जिम्मेदार है। अस्थमा का सीधा अर्थ सांस लेने में तकलीफ है। इसका समय पर उपचार करवाना जरूरी है। युवा और बुजुर्गों के अलावा अब बच्चे भी इस रोग से पीड़ित होने लगे हैं।

1998 से मनाया जा रहा अस्थमा दिवस

वर्ष 1998 में बार्सिलोना स्पेन में आयोजित विश्व अस्थमा बैठक में 33 से अधिक देशों ने पहली बार यह दिवस मनाया था।  तब से यह प्रतिवर्ष मई माह के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना उपचार समय पर लेना और उपचार की गुणवत्ता में सुधार करना है।
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