फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   teachers day indore news central library

Teachers Day: विद्यालय को बनाया "शिक्षा-संस्कार एक्सप्रेस" और शत-प्रतिशत हुआ परीक्षा परिणाम

Wed, 04 Sep 2024 02:46 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Wed, 04 Sep 2024 02:46 PM IST
सार

शिक्षक दिवस पर नवाचारों से पहचान बनाने वाली शिक्षिका की कहानी, राज्यपाल ने किया पुरस्कृत।
 

विज्ञापन
teachers day indore news central library
छात्रों के साथ लिली डावर। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर

विस्तार

शिक्षक दिवस पर बात एक ऐसे अनूठे शिक्षक की, जिसने अपने 34 वर्षों के शिक्षा सेवाकाल के दौरान न केवल हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा बल्कि कई ऐसे नवाचार भी किये जिनसे संपूर्ण शिक्षा जगत लाभान्वित हुआ। शिक्षण गतिविधियों से इतर भी उन्होंने कई ऐसी जिम्मेदारियों को इतनी कर्मठता, सजगता और तत्परता से निभाया कि वो अपने आप में मिसाल बन गईं। ये हैं शहर की सुपरिचित शिक्षिका लिली संजय डावर। जिन्होंने कोरोना काल की भीषण त्रासदी के दौर की कड़वी यादों से विद्यार्थियों को उबारने के लिए पेडमी स्थित विद्यालय, जहां वो प्राचार्य के रूप में पदस्थ थीं, को "शिक्षा और संस्कार एक्सप्रेस" रेलगाड़ी का स्वरूप दे दिया। उनके इस प्रोजेक्ट को स्थानीय एवं प्रादेशिक स्तर के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर भी बहुत सराहा गया।
विज्ञापन


राज्यपाल और सांसद द्वारा पुरस्कृत
विद्यार्थियों, विद्यालयों एवं समाज हित में किए जा रहे उनके उत्कृष्ट कार्यों के दृष्टिगत उन्हें समय-समय पर महामहिम राज्यपाल, सांसद, संभागायुक्त, जिलाधीश, पुलिस आयुक्त सहित अनेकों सामाजिक, साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। लिली डावर बताती हैं कि उनके जीवन में सबसे कठिन समय तब आया जब करीब 16 साल पहले, सन 2008 में पति संजय डावर का साथ छूट गया। उन विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को नए सिरे से आकार देने के बजाय उन्होंने जीवन भर अकेले रहकर, हजारों-लाखों बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने का दुष्कर मार्ग चुना और उस संकल्प पर पूरी दृढ़ता से सफलतापूर्वक चलकर दिखाया। इसीलिए वो आज न केवल साथी शिक्षकों बल्कि औरों के लिए भी एक ऐसी आदर्श शिक्षिका बन गईं हैं, जिसका अनुसरण हर कोई करना चाहता है। 
विज्ञापन


ऐतिहासिक पुस्तकालय का कायाकल्प
वर्तमान में देवी अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय में क्षेत्रीय ग्रंथपाल जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ डावर, यहा भी अपने नवाचारों के माध्यम से 62 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक पुस्तकालय का कायाकल्प करने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं। लाइब्रेरी साइंस में प्रशिक्षित न होते हुए भी उन्होंने इस डिजिटल युग में हजारों विद्यार्थियों को पुस्तकालय से जोड़ने का आश्चर्यजनक कार्य अत्यंत सहजता से संभव कर दिखाया। अनेक नवाचारों के माध्यम से पुस्तकालय को अति सुंदर स्वरूप प्रदान किया। बच्चों के लिए एक रुपए में  पुस्तकालय की आजीवन सदस्यता प्रारंभ कर इतने बड़े ज्ञान के भंडार को उपलब्ध करवाया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गीतों के कैसेट्स से बनाया शिक्षा के लिए वातावरण
1990 में शिक्षक (व्याख्याता) के रूप में लिली जी सफर राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील के एक शासकीय विद्यालय से प्रारंभ हुआ था। जहां ग्रामीण परिवेश के बच्चों को उन्होंने रसायनशास्त्र जैसे नीरस एवं जटिल विषय को उन्होंने इतने रोचक तरीके से पढ़ाया कि वहां के पुराने स्टूडेंट उन्हें दशकों बाद भी याद करते हैं। इसी तरह उन्होंने देवास जिले के शासकीय विद्यालय में पदस्थ रहते हुए दूरस्थ ग्रामीण अंचल में साक्षरता अभियान में महती भूमिका निभाते हुए अनेकानेक गीतों की रचना कर और उनके ऑडियो, वीडियो कैसेट्स बनाकर शिक्षा के लिए वातावरण का निर्माण किया।

हर वर्ष बोर्ड परीक्षा परिणाण शत-प्रतिशत
एक शिक्षक के रूप में उनकी यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव इंदौर जिले के दूरस्थ आदिवासी ग्राम पेडमी में प्राचार्य के रूप में अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए आया। पांच वर्ष के कार्यकाल में हर वर्ष बोर्ड परीक्षा का शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम प्राप्त करने का उनका काम आज भी याद किया जाता है। यह वही स्कूल था, जहां उनके जुड़ने से पहले तक परीक्षा परिणाम बहुत अच्छा नहीं आता था। इसके अलावा उन्होंने वहां विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं खेलों आदि के आयोजन के माध्यम से बच्चों की शिक्षा के समग्र व्यक्तित्व निर्माण की बुनियाद रखी। मजदूर वंचित वर्ग के बच्चों को एयरपोर्ट सहित चिड़ियाघर, म्यूजियम आदि की सैर करवाकर उन्हें बाहरी दुनिया से परिचित करवाया। 


छात्रों पर खर्च किया अपना वेतन
2010 में डावर ने पति के नाम से मानव सेवा प्रकल्प "संजय स्पंदन" प्रारंभ किया। इस प्रकल्प के माध्यम से उन्होंने हजारों जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य आदि के लिए उल्लेखनीय कार्य किये। ये सिलसिला अब भी जारी है। खास बात ये कि ये सभी सेवा कार्य उन्होंने बिना किसी डोनेशन या अनुदान के अपने वेतन की राशि से किये। इस प्रकार लिली डावर ने न केवल एक शिक्षक के रूप विद्यार्थियों को औपचारिक शिक्षा दी बल्कि नवाचारों माध्यम से समाज में शिक्षक की गरिमा एवं गुरुता भी स्थापित की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed