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Family Court: पत्नी का मांग नहीं भरना क्रूरता, कोर्ट ने पति के पक्ष में सुनाया फैसला
Sat, 23 Mar 2024 04:06 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 23 Mar 2024 04:06 PM IST
सार
Family Court : इंदौर की एक फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिंदूर लगाना एक (हिंदू) महिला का कर्तव्य है जो यह दर्शाता है कि वह शादीशुदा है।
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फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
सिंदूर लगाना एक हिंदू महिला का कर्तव्य है। यह दर्शाता है कि वह शादीशुदा है। इंदौर फैमिली कोर्ट Family Court के प्रधान न्यायाधीश एनपी सिंह ने एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। कोर्ट ने महिला को तत्काल प्रभाव से अपने पति के घर लौटने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पत्नी का सिंदूर नहीं लगाना पति के लिए क्रूरता माना है। याचिकाकर्ता के वकील शुभम शर्मा ने कहा कि उनके मुवक्किल की शादी 2017 में हुई थी और दंपति का 5 साल का बेटा है।
कोर्ट ने पति के पक्ष में सुनाया फैसला
फैमिली कोर्ट की तरफ से इस मामले में पति के पक्ष में फैसला सुनाया गया है। कोर्ट ने फैसले में पत्नी को आदेश दिया है कि पति के पास वापस लौटें। कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि पति ने पत्नी को नहीं छोड़ा बल्कि वो अपने मर्जी से पति से अलग रह रही थी। उसने इस दौरान सिंदूर लगाना भी बंद कर दिया था। इसके बाद कोर्ट में पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए याचिका दायर की थी। पति के द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया था कि बिना किसी कारण के उसकी पत्नी पिछले पांच साल से उससे अलग रह रही है।
महिला ने लगाए दहेज के आरोप
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति ने अपने अधिकारों की बहाली की मांग की थी। कोर्ट की तरफ से महिला से पूछा गया कि उसने सिंदूर क्यों नहीं लगाया तो महिला ने कहा कि अलग रहने की वजह से उसने सिंदूर लगाना छोड़ दिया। इसके साथ महिला ने अपने बचाव में पति पर दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। इस पर कोर्ट ने देखा कि महिला ने पुलिस को पति के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है। दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद अदालत ने महिला को पति के पास वापस लौटने का आदेश दिया।
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कोर्ट ने पति के पक्ष में सुनाया फैसला
फैमिली कोर्ट की तरफ से इस मामले में पति के पक्ष में फैसला सुनाया गया है। कोर्ट ने फैसले में पत्नी को आदेश दिया है कि पति के पास वापस लौटें। कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि पति ने पत्नी को नहीं छोड़ा बल्कि वो अपने मर्जी से पति से अलग रह रही थी। उसने इस दौरान सिंदूर लगाना भी बंद कर दिया था। इसके बाद कोर्ट में पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए याचिका दायर की थी। पति के द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया था कि बिना किसी कारण के उसकी पत्नी पिछले पांच साल से उससे अलग रह रही है।
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महिला ने लगाए दहेज के आरोप
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति ने अपने अधिकारों की बहाली की मांग की थी। कोर्ट की तरफ से महिला से पूछा गया कि उसने सिंदूर क्यों नहीं लगाया तो महिला ने कहा कि अलग रहने की वजह से उसने सिंदूर लगाना छोड़ दिया। इसके साथ महिला ने अपने बचाव में पति पर दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। इस पर कोर्ट ने देखा कि महिला ने पुलिस को पति के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है। दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद अदालत ने महिला को पति के पास वापस लौटने का आदेश दिया।
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