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Indore: इंदौर की मंडियों में नहीं हुआ कामकाज, व्यापारी हड़ताल पर गए

Mon, 04 Sep 2023 07:50 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 04 Sep 2023 07:50 PM IST
सार

प्रतिदिन चोइथराम  मंडी में दस हजार से ज्यादा व्यापारी, किसान और ग्राहक आते है। सैकड़ों वाहन माल लेकर मंडी में पहुंचते है, लेकिन सोमवार को नजारा अलग था। मंडी सूनी पड़ी थी। जमीन पर पड़े अनाज को पक्षी चुग रहे थे।

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No work done in Indore mandis, traders went on strike
मंडियां सूनी रही, कबूतर दाना चुगते नजर आए। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

सरकार की नीतियों के खिलाफ अनाज, दाल, तिलहन व्यापारियों ने प्रदेश व्यापी हड़ताल सोमवार से शुरू की। प्रदेश की सबसे बड़ी चोइथराम और लक्ष्मीबाई नगर मंडी भी बंद रही। दिनभर कामकाज नहीं हुआ। इस कारण सैकड़ों सौदे अटके रहे। व्यापारियों ने मंडियों में काम करने के बजाए प्रदर्शन कर सरकार को कोसा। प्रतिदिन मंडियों में आने वाले अनाज के वाहन भी सड़क किनारे खड़े रहे। इससे यातायात भी बाधित हुअ। व्यापारी मंडी शुल्क और निराश्रित शुल्क खत्म करवाना चाहते है।

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इसके अलावा लीज नवीनीकरण नियमों की कमियों के कारण भी व्यापारियों को परेशानी आती है। सरकार ने इस तरफ भी ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा व्यापारी मंडी फीस के बढ़ाए जाने के भी विरोध में है। इन तमाम मुद्दों को लेकर व्यापारियों ने हड़ताल कर दी।

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प्रतिदिन चोइथराम  मंडी में दस हजार से ज्यादा व्यापारी, किसान और ग्राहक आते है। सैकड़ों वाहन माल लेकर मंडी में पहुंचते है, लेकिन सोमवार को नजारा अलग था। मंडी सूनी पड़ी थी। जमीन पर पड़े अनाज को पक्षी चुग रहे थे। कई व्यापारी भोापाल में हुए प्रदर्शन में शामिल होने के लिए इंदौर से सुबह रवाना हुए।

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व्यापारियों का कहना है कि मंडी बोर्ड मनमानी पर उतारु है। व्यापारी करोड़ों रुपये का टैक्स भरते है, लेकिन उनकी समस्या का ही हल नहीं होता। इंदौर की मंडी की दुकानों के लीज के मामले पांच साल से लंबित है। 1971 से बांग्लादेश के प्रवासियों के लिए लगाए गए निराश्रित शुल्क का अब क्या औचित्य है,लेकिन वह व्यापारियों से अभी तक वसूला जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक हमारी मांग नहीं मानी जाएगी, तब तक मंडियां बंद रहेगी।

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