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कोचिंग के नए नियमः बीच में कोचिंग छोड़ी तो फीस मिलेगी वापस, पैरेंट्स को झूठी जानकारी दी तो बंद होगी क्लास
Fri, 19 Jan 2024 01:38 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 19 Jan 2024 01:38 PM IST
सार
New Coaching Guidelines: शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग संस्थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसे न मानने पर एक लाख रुपए का जुर्माना होगा और कोचिंग बंद की जाएगी। इसके साथ कई अन्य नियम भी आए हैं।
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कोचिंग के लिए जारी हुई नई गाइडलाइन
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग संचालकों के लिए नए नियम New Coaching Guidelines जारी किए हैं। पढ़ाई के तनाव में छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और पैरेंट्स के द्वारा कोचिंग संचालकों की शिकायतें भी लगातार आ रही हैं। इसी वजह से यह नए नियम New Coaching Policy and Rules जारी किए गए हैं।
नियम नहीं माने तो एक लाख रुपए जुर्माना, बंद होगी कोचिंग
नए नियमों के अनुसार यदि कोचिंग सेंटर यदि आदेश नहीं मानेंगे तो एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। इसके साथ उनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द होगा। कोचिंग संस्थानों की उचित निगरानी की जाएगी। इसके लिए सरकार ने दिशानिर्देश के प्रभावी होने के तीन महीने के भीतर नए और मौजूदा कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण करने का प्रस्ताव किया है।
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यह हैं नए निर्देश New Coaching Guidelines
1. शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशा निर्देश के मुताबिक कोचिंग सेंटर 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिल नहीं कर सकेंगे।
2. अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे।
3. कोई भी कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं करेगा।
4. विद्यार्थियों का कोचिंग संस्थान में नामांकन माध्यमिक विद्यालय परीक्षा के बाद ही होना चाहिए।
5. अगर छात्र बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ता है तो उसकी बची हुई अवधि की फीस लौटाई जानी चाहिए।
6. विभिन्न पाठ्यक्रमों का शुल्क पारदर्शी और तार्किक होना चाहिए और वसूले जाने वाले शुल्क की रसीद दी जानी चाहिए।
7. कोचिंग संस्थान कोचिंग की गुणवत्ता या उसमें दी जाने वाली सुविधाओं या ऐसे कोचिंग संस्थान या उनके संस्थान में पढ़े छात्र द्वारा प्राप्त परिणाम के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी दावे को लेकर कोई भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकते हैं या प्रकाशित नहीं करवा सकते हैं या प्रकाशन में भाग नहीं ले सकते हैं।
8. कोचिंग संस्थान किसी भी शिक्षक या ऐसे व्यक्ति की सेवाएं नहीं ले सकते, जो नैतिक कदाचार से जुड़े किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो। कोई भी संस्थान तब तक पंजीकृत नहीं होगा जब तक कि उसके पास इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता के अनुसार परामर्श प्रणाली न हो।
9. दिशानिर्देश में कहा गया, कोचिंग संस्थानों की एक वेबसाइट होगी जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों (ट्यूटर्स) की योग्यता, पाठ्यक्रम/पाठ्य सामग्री, पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाएं और लिए जाने वाले शुल्क का अद्यतन विवरण होगा। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग संस्थानों को उन्हें तनाव से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन पर अनावश्यक दबाव डाले बिना कक्षाएं संचालित करनी चाहिए।
10. दिशानिर्देश में कहा गया, कोचिंग संस्थानों को संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में छात्रों को निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए। सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि कोचिंग संस्थान द्वारा एक परामर्श प्रणाली विकसित की जाए जो छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो।
क्यो बोले कोचिंग संचालक
कोचिंग संस्थानों का कहना है कि अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है। इसे लागू करने से पहले कई चरणों पर बातचीत की जाएगी। इसमें कई बदलाव होंगे जिसके बाद इसे लागू किया जाएगा। प्रस्ताव में यह भी दिया गया है कि राज्य सरकारों के ऊपर निर्भर करता है कि वह इसे किस तरह से लागू करवाते हैं।
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नियम नहीं माने तो एक लाख रुपए जुर्माना, बंद होगी कोचिंग
नए नियमों के अनुसार यदि कोचिंग सेंटर यदि आदेश नहीं मानेंगे तो एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। इसके साथ उनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द होगा। कोचिंग संस्थानों की उचित निगरानी की जाएगी। इसके लिए सरकार ने दिशानिर्देश के प्रभावी होने के तीन महीने के भीतर नए और मौजूदा कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण करने का प्रस्ताव किया है।
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यह हैं नए निर्देश New Coaching Guidelines
1. शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशा निर्देश के मुताबिक कोचिंग सेंटर 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिल नहीं कर सकेंगे।
2. अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे।
3. कोई भी कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं करेगा।
4. विद्यार्थियों का कोचिंग संस्थान में नामांकन माध्यमिक विद्यालय परीक्षा के बाद ही होना चाहिए।
5. अगर छात्र बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ता है तो उसकी बची हुई अवधि की फीस लौटाई जानी चाहिए।
6. विभिन्न पाठ्यक्रमों का शुल्क पारदर्शी और तार्किक होना चाहिए और वसूले जाने वाले शुल्क की रसीद दी जानी चाहिए।
7. कोचिंग संस्थान कोचिंग की गुणवत्ता या उसमें दी जाने वाली सुविधाओं या ऐसे कोचिंग संस्थान या उनके संस्थान में पढ़े छात्र द्वारा प्राप्त परिणाम के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी दावे को लेकर कोई भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकते हैं या प्रकाशित नहीं करवा सकते हैं या प्रकाशन में भाग नहीं ले सकते हैं।
8. कोचिंग संस्थान किसी भी शिक्षक या ऐसे व्यक्ति की सेवाएं नहीं ले सकते, जो नैतिक कदाचार से जुड़े किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो। कोई भी संस्थान तब तक पंजीकृत नहीं होगा जब तक कि उसके पास इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता के अनुसार परामर्श प्रणाली न हो।
9. दिशानिर्देश में कहा गया, कोचिंग संस्थानों की एक वेबसाइट होगी जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों (ट्यूटर्स) की योग्यता, पाठ्यक्रम/पाठ्य सामग्री, पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाएं और लिए जाने वाले शुल्क का अद्यतन विवरण होगा। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग संस्थानों को उन्हें तनाव से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन पर अनावश्यक दबाव डाले बिना कक्षाएं संचालित करनी चाहिए।
10. दिशानिर्देश में कहा गया, कोचिंग संस्थानों को संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में छात्रों को निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए। सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि कोचिंग संस्थान द्वारा एक परामर्श प्रणाली विकसित की जाए जो छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो।
क्यो बोले कोचिंग संचालक
कोचिंग संस्थानों का कहना है कि अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है। इसे लागू करने से पहले कई चरणों पर बातचीत की जाएगी। इसमें कई बदलाव होंगे जिसके बाद इसे लागू किया जाएगा। प्रस्ताव में यह भी दिया गया है कि राज्य सरकारों के ऊपर निर्भर करता है कि वह इसे किस तरह से लागू करवाते हैं।
