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MP Election: दिग्गज नेताओं का चुनाव क्षेत्र मनासा, सुंदरलाल पटवा-बालकवि बैरागी और कैलाश चावला दो बार जीते
सार
मनासा विधानसभा क्षेत्र नीमच जिले में आता है पर लोकसभा में मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में आता है। यहां से कई दिग्गज नेता चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा, पूर्व मंत्री दिवंगत बालकवि बैरागी और पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा शामिल हैं।
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मध्यप्रदेश चुनाव 2023
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान की सीमा से लगा नीमच जिले की सांस्कृतिक विरासत पर मारवाड़ की छाप देखने को मिलती है। मालवा का यह जिला कई मायनों में लोकप्रिय है। यहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस यानी सीआरपीएफ का प्रशिक्षण केंद्र और देश का दूसरा अल्कलॉइड संयंत्र है। अफीम उत्पादन का क्षेत्र में प्राचीन इतिहास है। मनासा विधानसभा क्षेत्र नीमच जिले में आता है पर लोकसभा में मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में आता है। यहां से कई दिग्गज नेता चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा, पूर्व मंत्री दिवंगत बालकवि बैरागी और पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा शामिल हैं।
करपात्री महाराज ने बनाई थी रामराज्य परिषद
1952 से मध्य भारत का हिस्सा रहे मनासा से पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रामलाल ने जीत दर्ज की थी। उस समय निकटतम प्रतिद्वंद्वी रामराज्य परिषद पार्टी के प्रताप सिंह रहे थे। स्वामी करपात्री महाराज ने 1948 में रामराज्य परिषद दल की स्थापना की थी, 1971 में इस दल का भारतीय जनसंघ में विलय हो गया था।
बालकवि बैरागी से हारे थे पटवा
1956 में मध्य प्रदेश के निर्माण के बाद 1957 और 1962 के चुनाव में जनसंघ के सुंदरलाल पटवा यहां से विजयी रहे थे। 1967 में सुंदरलाल पटवा कांग्रेस के बालकवि बैरागी (नंदराम दास) से पराजित हो गए थे। 1972 में पटवा फिर कांग्रेस के उम्मीदवार से चुनाव हार गए। 1977 में जनता पार्टी के चुनाव चिंह हलधर किसान की देश में लहर थी तब सुंदरलाल पटवा ने मनासा के बजाय मंदसौर से चुनाव लड़ा था। मनासा से रामचंद्र बसर जनता पार्टी के उम्मीदवार थे और वे विजयी रहे।
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1990 में राधेश्याम लढ्ढा ने नाहटा को हराया था
1980 के चुनाव में कांग्रेस के बालकवि बैरागी पुनः विजयी रहे। उन्होंने भाजपा के राधेश्याम लड्ढा को पराजित किया था। 1985 के चुनाव में कांग्रेस के प्रति देश भर में सहानुभूति व्याप्त थी और उसका फायदा भी मिला। कांग्रेस के नरेंद्र नाहटा से भाजपा और जनसंघ के कद्दावर नेता प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा चुनाव हार गए थे। 1990 में नरेंद्र नाहटा को भाजपा के राधेश्याम लड्ढा ने पराजित कर भाजपा का इस क्षेत्र में जन्म के बाद खाता खोला था। 1993 और 1998 में नरेंद्र नाहटा विजयी रहे थे, 1998 में पटवा परिवार के मंगल पटवा ने चुनाव लड़ा पर जीत नहीं पाए। इस तरह 1998 के बाद पटवा परिवार का मनासा क्षेत्र से उम्मीदवारी से नाता नहीं रहा।
2008 में मालाहेड़ा विजयी रहे थे
2008 में भाजपा से पृथक होकर उमा भारती द्वारा भारतीय जनशक्ति पार्टी का गठन किया। मनासा से भारतीय जन शक्ति पार्टी के अनिरुद्ध रामेश्वर (माधव मारू) दूसरे स्थान पर रहे और भाजपा के कैलाश चावला तीसरे स्थान पर रहे, एक ही दल के विवाद का फायदा कांग्रेस को मिला और विजेन्द्रसिंह मालाहेड़ा विजयी रहे। ठीक यही हालत 1993 में रही थी। सकलेचा गुट के रामेश्वर मारू को भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय खड़े हो गए और दूसरे स्थान पर रहे, वहीं भाजपा में पटवा गुट के राधेश्याम लड्ढ़ा तीसरे स्थान पर रहे। इस आपसी विवाद का फायदा कांग्रेस को मिला और नरेंद्र नाहटा विजयी रहे थे। 2013 में कैलाश चावला और 2018 में अनिरुद्ध माधव मारू भाजपा से विजयी रहे। 1962 के बाद यह पहला मौका था कि 2013 और 2018 में भाजपा का मनासा पर लगातार दो बार आधिपत्य रहा।
इस बार दोनों दलों में हो रहा प्रत्याशियों का विरोध
विधानसभा चुनाव 2023 में दोनों ही दलों के उम्मीदवारों का विरोध हो रहा है। भाजपा ने अनिरुद्ध माधव मारू को टिकट दिया है, जबकि स्थानीय नेता उनका विरोध कर रहे हैं। नामांकन के दिन पूर्व मंत्री कैलाश चावला और राजेश लड्ढा ने भी नामांकन भरा है जो भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
नाहटा को बता रहे बाहरी
यही हाल कांग्रेस का है नरेंद्र नाहटा को बाहरी उम्मीदवार बता कर स्थानीय कांग्रेसी विरोध कर रहे हैं। पूर्व विधायक विजेन्द्रसिंह मालाहेड़ा ने भी निर्दलीय नामांकन भरा है। घोषित प्रत्याशी का दोनों दलों में विरोध हो रहा है। वैसे भाजपा और कांग्रेस द्वारा डैमेज कंट्रोल के भरसक प्रयास जारी हैं। देखना है कितने नाम वापस होते हैं और कौन मैदान में रहकर ताल ठोंकता है।
मतदाता संख्या
मनासा सीट की रोचक जानकारी
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करपात्री महाराज ने बनाई थी रामराज्य परिषद
1952 से मध्य भारत का हिस्सा रहे मनासा से पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रामलाल ने जीत दर्ज की थी। उस समय निकटतम प्रतिद्वंद्वी रामराज्य परिषद पार्टी के प्रताप सिंह रहे थे। स्वामी करपात्री महाराज ने 1948 में रामराज्य परिषद दल की स्थापना की थी, 1971 में इस दल का भारतीय जनसंघ में विलय हो गया था।
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बालकवि बैरागी से हारे थे पटवा
1956 में मध्य प्रदेश के निर्माण के बाद 1957 और 1962 के चुनाव में जनसंघ के सुंदरलाल पटवा यहां से विजयी रहे थे। 1967 में सुंदरलाल पटवा कांग्रेस के बालकवि बैरागी (नंदराम दास) से पराजित हो गए थे। 1972 में पटवा फिर कांग्रेस के उम्मीदवार से चुनाव हार गए। 1977 में जनता पार्टी के चुनाव चिंह हलधर किसान की देश में लहर थी तब सुंदरलाल पटवा ने मनासा के बजाय मंदसौर से चुनाव लड़ा था। मनासा से रामचंद्र बसर जनता पार्टी के उम्मीदवार थे और वे विजयी रहे।
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1990 में राधेश्याम लढ्ढा ने नाहटा को हराया था
1980 के चुनाव में कांग्रेस के बालकवि बैरागी पुनः विजयी रहे। उन्होंने भाजपा के राधेश्याम लड्ढा को पराजित किया था। 1985 के चुनाव में कांग्रेस के प्रति देश भर में सहानुभूति व्याप्त थी और उसका फायदा भी मिला। कांग्रेस के नरेंद्र नाहटा से भाजपा और जनसंघ के कद्दावर नेता प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा चुनाव हार गए थे। 1990 में नरेंद्र नाहटा को भाजपा के राधेश्याम लड्ढा ने पराजित कर भाजपा का इस क्षेत्र में जन्म के बाद खाता खोला था। 1993 और 1998 में नरेंद्र नाहटा विजयी रहे थे, 1998 में पटवा परिवार के मंगल पटवा ने चुनाव लड़ा पर जीत नहीं पाए। इस तरह 1998 के बाद पटवा परिवार का मनासा क्षेत्र से उम्मीदवारी से नाता नहीं रहा।
2008 में मालाहेड़ा विजयी रहे थे
2008 में भाजपा से पृथक होकर उमा भारती द्वारा भारतीय जनशक्ति पार्टी का गठन किया। मनासा से भारतीय जन शक्ति पार्टी के अनिरुद्ध रामेश्वर (माधव मारू) दूसरे स्थान पर रहे और भाजपा के कैलाश चावला तीसरे स्थान पर रहे, एक ही दल के विवाद का फायदा कांग्रेस को मिला और विजेन्द्रसिंह मालाहेड़ा विजयी रहे। ठीक यही हालत 1993 में रही थी। सकलेचा गुट के रामेश्वर मारू को भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय खड़े हो गए और दूसरे स्थान पर रहे, वहीं भाजपा में पटवा गुट के राधेश्याम लड्ढ़ा तीसरे स्थान पर रहे। इस आपसी विवाद का फायदा कांग्रेस को मिला और नरेंद्र नाहटा विजयी रहे थे। 2013 में कैलाश चावला और 2018 में अनिरुद्ध माधव मारू भाजपा से विजयी रहे। 1962 के बाद यह पहला मौका था कि 2013 और 2018 में भाजपा का मनासा पर लगातार दो बार आधिपत्य रहा।
इस बार दोनों दलों में हो रहा प्रत्याशियों का विरोध
विधानसभा चुनाव 2023 में दोनों ही दलों के उम्मीदवारों का विरोध हो रहा है। भाजपा ने अनिरुद्ध माधव मारू को टिकट दिया है, जबकि स्थानीय नेता उनका विरोध कर रहे हैं। नामांकन के दिन पूर्व मंत्री कैलाश चावला और राजेश लड्ढा ने भी नामांकन भरा है जो भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
नाहटा को बता रहे बाहरी
यही हाल कांग्रेस का है नरेंद्र नाहटा को बाहरी उम्मीदवार बता कर स्थानीय कांग्रेसी विरोध कर रहे हैं। पूर्व विधायक विजेन्द्रसिंह मालाहेड़ा ने भी निर्दलीय नामांकन भरा है। घोषित प्रत्याशी का दोनों दलों में विरोध हो रहा है। वैसे भाजपा और कांग्रेस द्वारा डैमेज कंट्रोल के भरसक प्रयास जारी हैं। देखना है कितने नाम वापस होते हैं और कौन मैदान में रहकर ताल ठोंकता है।
मतदाता संख्या
| कुल मतदाता | 1 लाख 99 हजार 929 |
| पुरुष | 1 लाख 1 हजार 483 |
| महिला | 98 हजार 445 |
| थर्ड जेंड | 1 |
मनासा सीट की रोचक जानकारी
- सबसे कम मतों से बालकवि बैरागी की जीत 1967 में सुंदरलाल पटवा से 741 मतों से हुई थी।
- सर्वाधिक मतों से जीत 2018 में भाजपा के अनिरुद्ध माधव मारू की 25,954 मतों से हुई थी।
- सर्वाधिक मतदान वर्ष 2018 में 84.86 प्रतिशत हुआ था।
- 2018 में नोटा का उपयोग 2117 मतदाताओं ने किया था।
- सुंदरलाल पटवा, बालकवि बैरागी और कैलाश चावला दो बार विजयी रहे थे, नरेंद्र नाहटा तीन बार विजयी रहे हैं।
