Indore News: रिश्वत के खिलाफ सरकार का बड़ा कदम, अब शिकायतकर्ताओं को तुरंत मिलेगी उनकी रकम
Indore News: मध्यप्रदेश सरकार रिश्वत के खिलाफ नई पहल कर रही है, जिसमें लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को 40 लाख रुपए का विशेष फंड मिलेगा। इस फंड से रंगे हाथों पकड़े जाने वाले मामलों में शिकायतकर्ताओं को उनकी दी गई राशि तुरंत वापस मिल जाएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नया कदम उठाते हुए मोहन सरकार ने आगामी वित्त वर्ष, यानी अप्रैल से एक नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जैसी जांच एजेंसियों को 40 लाख रुपए का विशेष फंड प्रदान किया जाएगा। इस फंड का उपयोग उन मामलों में किया जाएगा, जहां सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाते हैं। इसके तहत शिकायतकर्ता को अभियोजन की प्रक्रिया शुरू होते ही उसकी रिश्वत के रूप में दी गई राशि लौटा दी जाएगी। अभी तक, शिकायतकर्ताओं को वर्षों तक अपनी राशि के लिए इंतजार करना पड़ता था, और फिलहाल लगभग 3 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं।
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू द्वारा अक्सर रिश्वतखोर सरकारी कर्मचारियों को पकड़ा जाता है, लेकिन इन मामलों में शिकायतकर्ता को पहले अपनी जेब से रिश्वत की पूरी रकम देनी पड़ती है। यह राशि जब्त कर ली जाती है और अदालत में मामला लंबित रहने तक फंसी रहती है। इसमें 5000 रुपए से लेकर 5 लाख रुपए या उससे अधिक की राशि शामिल हो सकती है। इस कारण, कई लोग डर के कारण शिकायत करने से बचते हैं। मगर अब सरकार 40 लाख रुपए का एक विशेष फंड बनाएगी, जिससे शिकायतकर्ता को उसकी राशि अभियोजन की प्रक्रिया शुरू होते ही लौटा दी जाएगी। इसके बदले, सरकार इस फंड से उतनी ही राशि उपयोग में ले लेगी।
वर्तमान व्यवस्था में शिकायतकर्ताओं को 5, 10 या 15 साल तक अपनी राशि वापस पाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। मामला अदालत में सुलझने के बाद ही उन्हें अपनी मूल राशि मिलती है, वह भी बिना किसी ब्याज या अतिरिक्त लाभ के। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के तहत, जैसे ही रिश्वतखोर पकड़ा जाएगा, शिकायतकर्ता को तुरंत विशेष फंड से भुगतान कर दिया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों को बल मिलेगा और लोकायुक्त तथा ईओडब्ल्यू को भी फायदा होगा, क्योंकि कई शिकायतकर्ता पैसे फंसने के डर से मामले दर्ज नहीं करवाते थे।
अब चूंकि शिकायतकर्ताओं को उनकी राशि जल्द ही वापस मिल जाएगी, वे बड़ी रकम की व्यवस्था करने में भी सक्षम होंगे। सरकार का मानना है कि इस पहल से रिश्वतखोरों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और प्रदेश में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया जा सकेगा।
