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Lit Chowk Season 3: विधायक रिवाबा ने कहा- मैं सेलिब्रिटी लाइफ से खुश नहीं थी, खालीपन दूर करने राजनीति में आई
Sat, 16 Dec 2023 08:08 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 16 Dec 2023 08:08 PM IST
सार
Lit Chowk Season 3: लिट चौक सीजन-3 के दूसरे दिन कई हस्तियों ने शिरकत की। उनमें गुजरात के जामनगर विधायक रिवाबा जडेजा भी शामिल थीं। उन्होंने राजनीति, क्रिकेट और संस्कृति सहित कई मुद्दों पर चर्चा की और बेबाकी से जवाब दिए।
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जामनगर विधायक रिवाबा जडेजा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लिट चौक सीजन-3 का आयोजन मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में हो रहा है। आयोजन के दूसरे दिन कई हस्तियां शिरकत कीं। इनमें गुजरात के जामनगर से विधायक रिवाबा जडेजा भी मौजूद रहीं। विधायक रिवाबा ने कहा, सेलिब्रिटी लाइफ से मैं खुश नहीं थी। जिंदगी में कुछ खालीपन लग रहा था। फिर मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राजनीति में आई। उन्होंने कहा था कि अच्छे लोगों की हमें भी जरूरत है। देश में कुछ बदलना है तो राजनीति में उतरना पड़ेगा।
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स्टेडियम में अपने क्रिकेटर पति रवींद्र जडेजा के पैर छूने के बारे में रिवाबा ने कहा कि इसके पीछे फनी स्टोरी है। जड्डू किसी बात को सीरियस नहीं लेते। इतने मजाकिया हैं कि कई बार रुला देने की हद तक मस्ती चलती है। वे मुझे कई बार कहते थे कि सरनेम की वजह से तुम्हें कितना फायदा हुआ है, तुम्हें मेरे सबके सामने पैर छूना चाहिए। मैं कहती थी कि ऐसा कुछ काम तो करिए। मुझे वो पल चाहिए था। जब वो पल मिला तो जड्डू शाहरुख के पोज में खड़े थे और मैंने पैर छू लिए। मैं उन्हें जताना चाहती थी कि सम्मान मांगने से नहीं मिलता, वो पाया जाता है।
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'मैं एयरफोर्स में जाना चाहती थी'
रिवाबा ने कहा कि मेरा मैथ्स अच्छा था, इसलिए मैकेनिकल इंजीनियर बनी। कालेज में लड़कों के साथ रहकर कॉन्फिडेंस मिला। वहां लड़की समझकर मुझे ट्रीट नहीं करता था कोई। फिर मेरी एयरफोर्स में जाने की इच्छा थी, लेकिन परिवार के लोगों को शादी की चिंता रहती है, इसलिए वो सपना रह गया।
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हार से उबरने में समय लगता है
रिवाबा ने फाइनल की हार के बाद घर के माहौल के निजी पल भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वो हार पूरे देश के लिए निराशाजनक नहीं थी। मैं बिना कुछ कहे बिना कुछ पूछे, उन्हें हार से दूर करने की कोशिश करती हूं। हार से उबरने में समय लगता है।
आसपास के लोगों से भी लड़ना पड़ता है
राजनीति से जुड़ी चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा कि दूर के ढोल सुहाने लगते हैं। मैं स्पष्टवादी हूं, कई बार इस वजह से परेशानी भी झेलनी पड़ती है। मैंने इस बारे में हमारे गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि प्रतिद्वंदी से हम पांच साल के बाद लड़ते हैं। लेकिन पांच साल हमें अपने आसपास के लोगों से लड़ाई लड़ना है।
