फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Labor Day today: Indore's labor movement is over, once there was an echo of labor unions all over the country

श्रमिक दिवस आज: इंदौर का खत्म हुआ मजदूर आंदोलन, कभी थी पूरे देश में श्रम संघों की गूंज

Thu, 01 May 2025 03:31 PM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Thu, 01 May 2025 03:31 PM IST
सार

इंदौर की कपड़ा मिलों और मजदूर आंदोलनों का गौरवशाली इतिहास रहा है। 1867 से शुरू हुई मिलें 2003 तक बंद हो गईं। मजदूर यूनियनों ने मजदूरों के हक के साथ जन आंदोलनों में भी भूमिका निभाई। होमी दाजी जैसे नेताओं ने सामाजिक बदलाव में अहम योगदान दिया।

विज्ञापन
Labor Day today: Indore's labor movement is over, once there was an echo of labor unions all over the country
राजकुमार मिल,,जब कपड़ा मिल चालू थी,मजदूर मिल में जाते हुए - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

एक मई 1886 से विश्व भर में इस दिन मजदूर दिवस मनाया जाता है। मजदूरों के हक और उनकी मांगों के लड़ाई लड़ने वाले श्रमिक संघों की मजदूर आंदोलनों में महती भूमिका रही है। देश में सूती कपड़ा मिलों के रूप में इंदौर की अलग पहचान थी। द्वितीय विश्व युद्ध में इंदौर की कपड़ा मिल से निर्मित कपड़ा टेंट और अन्य कार्यों में उपयोग होता था। जहां मजदूर होते हैं वहां उनकी मांगों के लिए यूनियन बन ही जाती है। इंदौर मिल मजदूर संघ का एक समय देश में काफी नाम था। तेज तर्रार मजदूर नेता कॉमरेड होमी दाजी इसके अगुआ थे। उनकी सभा सुनने के लिए मिलों के गेट पर भीड़ लग जाया करती थी। आज इंदौर में न कपड़ा मिलें रही हैं, न मजदूर संघ, यदि हैं भी तो वे नाममात्र के।
विज्ञापन


इंदौर में पहली कपड़ा मिल 1867 में लगी
इंदौर में पहली कपड़ा मिल 1867 में आरंभ हुई थी, जो स्टेट कपड़ा मिल के नाम से जानी जाती थी। इस मिल का संचालन एक अंग्रेज अधिकारी ब्रूम को सौंपा गया था। यह मिल आग लग जाने से बंद हो गई थी। 1909 में पहली निजी कपड़ा मिल मालवा मिल आरंभ हुई। 1924 तक नगर में कपड़ा मिलों की संख्या बढ़कर छह हो गई थी। 1924 से नगर में कपड़ा मिलों का स्वर्ण काल आरंभ हुआ था। यह करीब 64 साल तक चला।
विज्ञापन


1986 से बंद होना शुरू हुईं मिलें
1986 में पहली होप टेक्सटाइल मिल (भंडारी) मिल बंद हुई, यह सिलसिला 31 मार्च 2003 तक अंतिम मालवा मिल बंद होने तक जारी रहा। नगर में सभी मिलों के आरंभ होने और बंद होने के क्रम को देखें तो नगर में कपड़ा मिलों की औसत आयु 78 वर्ष रही। इन मिलो में करीब 10 से 15 हजार कर्मचारी कार्य करते थे। ये मजदूर यूनियन की मुख्य शक्ति थे।
विज्ञापन
विज्ञापन



प्रसिद्ध मजदूर नेता होमिदजी

कब बना मिल मजदूर संघ
नगर में मजदूर संघ की स्थापना 1939 में हुई थी। इस संस्था में उस वक्त कामरेड लक्ष्मण खंडकर, नारायण नेवासकर, दिवाकर, दत्तात्रय सरमंडल, मुंशी मुख्तार अहमद, पीर खां पठान और श्रीमती अन्नपूर्णा बाई भंडारकर प्रमुख थे। इंदौर के मजदूर संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध में बढ़ती महंगाई के विरुद्ध आंदोलन किया था।

ये भी पढ़ें- इंदौर में नर्मदा के तीन चरणों के बावजूद जलसंकट, टैंकरों के भरोसे शहर

1941 में मजदूरों पर चली थी गोलियां
1941 में नगर में मजदूरों की शांति पूर्ण मांग और आंदोलन पर पुलिस द्वारा गोली चालन से चार मजदूरों की मौत हो गई थी। 1941 के दिसंबर महीने में रामसिंह भाई वर्मा और वीवी द्रविड़ ने इंदौर मिल मजदूर संघ इंटक की स्थापना की और 1942 में नगर में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई और कॉमरेड दिवाकर पहले सचिव चुने गए। कपड़ा मिलों में मजदूरों के हक के लिए समय-समय पर आंदोलन होते रहे।


सांस्कृतिक विरासत को सहेजा
मिल मजदूर संघों में इंदौर में सांस्कृतिक विरासत को सहेजा, गणेश उत्सव की प्रतिवर्ष निकलने वाली झांकियां विरासत के साथ 100 वर्ष से अनवरत नगर की सड़कों पर अनंत चौदस को निकलती हैं। मिल मजदूर संघों द्वारा कवि सम्मलेन, कव्वाली आदि कार्यक्रम गणेश उत्सव के दौरान आयोजित किए जाते थे, जो अब नगर में बहुत ही कम होते हैं।

ये भी पढ़ें- इंदौर में हर दिन 9 गाड़ियां हो रही चोरी, हर साल बढ़ता जा रहा चोरी का आंकड़ा

जन आंदोलनों में मजदूरों की भूमिका
नगर में मजदूर आंदोलन ने मजदूरों की मांगों के साथ आम जनता के आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंदौर में पेयजल के लिए शांतिपूर्ण नर्मदा आंदोलन आंदोलन में मजदूरों ने अभूतपूर्व सहयोग दिया था। 1957 के विधानसभा चुनाव में मजदूर नेता होमी दाजी की विजय, 1958 में नगर पालिका चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी समर्थित नागरिक मोर्च ने बहुमत प्राप्त किया था।

साइकिल पर टैक्स हटवाया, कई कॉलोनियां बसाईं
मजदूरों ने ही इंदौर नगर में साइकिल पर लगने वाला टैक्स हटवाया, कम कीमतों के मकानों पर संपत्ति कर समाप्त करवाया। 1962 के लोकसभा चुनाव में इंदौर से मजदूर नेता होमी दाजी विजयी रहे। इसके अतिरिक्त मिलों के मजदूरों के हक की लड़ाई में नगर के मजदूर नेताओं के साथ मजदूर संघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मिल क्षेत्रों में सर्वहारा नगर, विजय नगर, नंदा नगर, नेहरू नगर और क्लर्क कॉलोनी की स्थापना में मजदूरों की महती भूमिका रही। नंदा नगर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. गुलजारी लाल नंदा के नाम पर है, वे इंदौर आए थे, तब इस कॉलोनी का नामकरण किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed