{"_id":"63dfc2f58f5d680a4b27251e","slug":"jaivik-kheti-cow-original-purity-products-kisaan-2023-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजदूर ने सीखी जैविक खेती और सोशल मीडिया मार्केटिंग, इस साल का टर्नओवर था 58 लाख रुपए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजदूर ने सीखी जैविक खेती और सोशल मीडिया मार्केटिंग, इस साल का टर्नओवर था 58 लाख रुपए
Sun, 05 Feb 2023 08:25 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 05 Feb 2023 08:25 PM IST
सार
यह कहानी है रमेश भाई रूपारेलिया की। वे खेत में मजदूरी करते थे। उन्होंने जैविक खेती सीखी और आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 58 लाख रुपए है।
विज्ञापन
रमेश भाई रूपारेलिया
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
कहते हैं न कि चाहत हो तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ ऐसी ही कहानी है रमेश भाई रूपारेलिया की। रमेश भाई गुजरात के गोंडल से निकलकर आज दुनियाभर में पहचाने जाते हैं। उनके जैविक और गोपालन आधारित प्रोडक्ट 125 देशों तक जाते हैं। उनकी कंपनी का इस साल का टर्नओवर 58लाख रुपए रहा है।
कर्ज में बिक गई जमीन और गहने
रमेश भाई ने बताया कि उन्होंने गोसेवा के लिए एक गौशाला बनाई। उसमें इतना रम गए कि दिनभर गोसेवा ही करते थे। परिवार पर कर्ज था जिसकी वजह से उनकी जमीन, घर के गहने सबकुछ बिक गए। इसके बाद एक व्यापारी के खेत में उन्हें मजदूरी का काम मिला। उन्होंने यहां पर खेती करना शुरू किया। उन्होंने कैमिकल और फर्टिलाइजर के उपयोगा का सोचा पर पैसे नहीं थे तो कुछ भी नहीं खरीदा। उनके पास बड़ी संख्या में गायें थी। उन्होंने गाय के गोबर और गोमूत्र का खेती में खाद के रूप में उपयोग किया। इसके बाद फसल अच्छी होने लगी। कुछ साल बाद उनके खेतों से एक बार में 35 लाख रुपए की प्याज हुई। इसके बाद उन्हें लोकप्रियता मिली और लोग उनसे खेती सीखने आने लगे।
जमकर करते हैं सोशल मीडिया का उपयोग
रमेश भाई अपने खेती और गोशाला के प्रोडक्ट के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग करते हैं। कहते हैं, किसान को व्यापारी बनना होगा तभी वह पूरा फायदा ले पाएगा। वे अपने प्रोडक्ट मंडी में नहीं बेचते। खुद पैकेजिंग करते हैं ग्राहक तक पहुंचाते हैं। उनकी कंपनी में आज सौ लोग काम करते हैं। वे लोगों को खेती करना भी सिखाते हैं। उनके यहां दुनियाभर से लोग खेती सीखने के लिए आते हैं।
विज्ञापन
जैविक के लिए सरकार को बदलना होंगी नीतियां
रमेश भाई कहते हैं जैविक को बढ़ाने के लिए सरकार को भी नीतियों में बदलाव करना होगा। अभी जो भी सब्सिडी कैमिकल आधारित खेती को मिल रही है वह बंद होना चाहिए। सब्सिडी जैविक खेती पर मिलेगी तो लोग उसके लिए प्रेरित होंगे। इसके साथ जैविक को पहचानने के लिए स्टैंडर्ड लाना होंगे। लोग जैविक प्रोडक्ट असली है या नकली यह भेद नहीं कर पाते। इसके लिए सरकार को स्टैंडर्ड डलवप करना होंगे।
विज्ञापन
कर्ज में बिक गई जमीन और गहने
रमेश भाई ने बताया कि उन्होंने गोसेवा के लिए एक गौशाला बनाई। उसमें इतना रम गए कि दिनभर गोसेवा ही करते थे। परिवार पर कर्ज था जिसकी वजह से उनकी जमीन, घर के गहने सबकुछ बिक गए। इसके बाद एक व्यापारी के खेत में उन्हें मजदूरी का काम मिला। उन्होंने यहां पर खेती करना शुरू किया। उन्होंने कैमिकल और फर्टिलाइजर के उपयोगा का सोचा पर पैसे नहीं थे तो कुछ भी नहीं खरीदा। उनके पास बड़ी संख्या में गायें थी। उन्होंने गाय के गोबर और गोमूत्र का खेती में खाद के रूप में उपयोग किया। इसके बाद फसल अच्छी होने लगी। कुछ साल बाद उनके खेतों से एक बार में 35 लाख रुपए की प्याज हुई। इसके बाद उन्हें लोकप्रियता मिली और लोग उनसे खेती सीखने आने लगे।
विज्ञापन
जमकर करते हैं सोशल मीडिया का उपयोग
रमेश भाई अपने खेती और गोशाला के प्रोडक्ट के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग करते हैं। कहते हैं, किसान को व्यापारी बनना होगा तभी वह पूरा फायदा ले पाएगा। वे अपने प्रोडक्ट मंडी में नहीं बेचते। खुद पैकेजिंग करते हैं ग्राहक तक पहुंचाते हैं। उनकी कंपनी में आज सौ लोग काम करते हैं। वे लोगों को खेती करना भी सिखाते हैं। उनके यहां दुनियाभर से लोग खेती सीखने के लिए आते हैं।
विज्ञापन
जैविक के लिए सरकार को बदलना होंगी नीतियां
रमेश भाई कहते हैं जैविक को बढ़ाने के लिए सरकार को भी नीतियों में बदलाव करना होगा। अभी जो भी सब्सिडी कैमिकल आधारित खेती को मिल रही है वह बंद होना चाहिए। सब्सिडी जैविक खेती पर मिलेगी तो लोग उसके लिए प्रेरित होंगे। इसके साथ जैविक को पहचानने के लिए स्टैंडर्ड लाना होंगे। लोग जैविक प्रोडक्ट असली है या नकली यह भेद नहीं कर पाते। इसके लिए सरकार को स्टैंडर्ड डलवप करना होंगे।
