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Indore: इंदौर के बेलेश्वर बावड़ी हादसे में दो आरोपी गिरफ्तार, 36 लोगों की जान गई थी हादसे में

Fri, 22 Mar 2024 06:15 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Fri, 22 Mar 2024 06:15 PM IST
सार

बेलेश्वर मंदिर में पिछले साल रामनवमी पर हवन कराया गया। इसके लिए वह स्थान चुना गया, जहां बावड़ी पर वर्षों पहले स्लैब बिछाई गई थी। हवन कुंड की गर्मी और लोगों की भीड़ से स्लैब टूट गई और 36 लोगों की मौत हो गई थी।

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Indore: Two accused arrested in Indore's Beleshwar stepwell accident, 36 people lost their lives in the accide
बेलेश्वर मंदिर बावड़ी हादसा - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

पिछले साल रामनवमी को इंदौर के पटेल नगर में हुए बेलेश्वर बावड़ी हादसे मामले में दो आरोपियों ने गिरफ्तारी दी है। पुलिस तो उन्हें नहीं पकड़ पाई। वे खुद थाने पहुंचे। दोनो आरोपी मंदिर ट्रस्ट से जुड़े है।

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शुक्रवार सुबह मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सेवाराम गलानी और सचिव मुरली सबनानी थाने में पेश हुए। पुलिस ने पहले उनका मेडिकल कराया फिर उन्हें कोर्ट में पेश किया।  पुलिस ने यह गिरफ्तारी हादसे के 11 माह बाद की है। कोर्ट ने दोनो को सेंट्रल जेल भेज दिया। उधर दोनो की गिरफ्तारी का सिंधी समाज के कुछ लोगों ने विरोध किया। उन्होंने अपने संस्थान बंद रखे। 

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दोनो पदाधिकारियों को मजिस्ट्रियल जांच में भी जिम्मेदार माना गया था, हालांकि हादसे के बाद उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। बावड़ी हादसे में पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद दि्वेदी की तरफ से जनहित याचिकाएं लगाई थी। जिसमें दोषियों पर कड़ा एक्शन लेने और मृतकों को परिवारों को 25-25 लाख का मुआवजा देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आश्चर्य जताया था कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की, जबकि हादसे में 36 लोगों की जान जा चुकी है।

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बावड़ी पर स्लैब डालकर मंदिर का निर्माण

बेलेश्वर मंदिर में पिछले साल रामनवमी पर हवन कराया गया। इसके लिए वह स्थान चुना गया, जहां बावड़ी पर वर्षों पहले स्लैब बिछाई गई थी। हवन कुंड की गर्मी और लोगों की भीड़ से स्लैब टूट गई और 60 से ज्यादा लोग बावड़ी में गिर पड़े। उनमें से कई लोग तो सीढि़यों व रस्सियों के सहारे निकाल गए, लेकिन 36 लोग मौत के मुंह में समा गए थे। उनके शव सेना की मदद से 24 घंटे चले अभियान के दौरान निकाले गए थे।

इस मामले में हुई मजिस्ट्रियल में गलानी और सबनानी को जिम्मेदार माना गया था,क्योकि वे जानते थे कि बावड़ी पर स्लैब बिछाकर मंदिर का शेड बनाया गया है। इसके बावजूद स्लैब पर इतनी भीड़ एकत्र होने दी। इसके अलावा नगर निगम के तत्कालीन व वर्तमान जोनल अधिकारी, जल संसाधन विभाग के अफसरों को भी जिम्मेदार माना गया है।



उन्होंने सर्वे के दौरान बावड़ी का पता नहीं लगाया और बावड़ी पर अवैध निर्माण होने से भी नहीं रोका। बावड़ी के पास सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया। हादसे के चार दिन बाद मंदिर और शेड तोड़कर बावड़ी को नगर निगम की रिमूवल गैंग ने मलबे से भर दिया था। उस फैसले का भी काफी विरोध हुआ था।

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