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इंदौर: दुकानों से हटेंगे QR कोड, व्यापारियों ने उठाया सख्त कदम, अब जेब में रखना होगा कैश
Fri, 09 Oct 2026 06:23 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Fri, 09 Oct 2026 06:23 PM IST
सार
इंदौर में UPI भुगतान पर प्रस्तावित सरचार्ज के विरोध में अहिल्या चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के नेतृत्व में व्यापारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। दुकानदारों ने दुकानों से QR कोड हटाकर नकद लेनदेन अपनाने और 5 दिवसीय जनसंपर्क अभियान चलाने का बड़ा फैसला लिया है।
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इंदौर में यूपीआई मर्चेंट पेमेंट शुल्क का विरोध करते व्यापारी।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
UPI के जरिये किए जाने वाले भुगतान पर प्रस्तावित सरचार्ज को लेकर शहर के व्यापारिक समुदायों में विरोध की लहर तेज हो गई है। अहिल्या चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के तत्वावधान में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस अतिरिक्त शुल्क के प्रति कड़ा ऐतराज जताया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी अपनी दुकानों से UPI आईडी और QR कोड हटा लेंगे।
MDR शुल्क वापस न होने तक नकद भुगतान को दी जाएगी प्राथमिकता
व्यापारियों का कहना है कि जब तक सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट से जुड़ा प्रस्तावित शुल्क वापस नहीं लेती, तब तक वे डिजिटल भुगतान की सुविधाएं बंद रखेंगे और केवल नकद लेनदेन को ही प्राथमिकता देंगे। बैठक के दौरान कारोबारियों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और प्रस्तावित सरचार्ज के खिलाफ नारे लगाए।
अतिरिक्त शुल्क से व्यापारिक लागत बढ़ने का दावा
चैंबर अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त शुल्क लागू होने से व्यापार संचालन की लागत में बढ़ोतरी होगी। पहले से ही बढ़ती महंगाई, ऊंचे परिचालन खर्च और घटते मुनाफे की चुनौतियों से जूझ रहे छोटे व मध्यम कारोबारियों पर यह नया आर्थिक बोझ डालना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। उपस्थित सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से इस शुल्क को तुरंत वापस लेने की मांग की।
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नीतियों का नहीं, केवल अनावश्यक आर्थिक बोझ का विरोध
चैंबर नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि व्यापारी समाज हमेशा से देश के विकास और सरकारी नीतियों के समर्थन में खड़ा रहा है। यह विरोध सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अनुचित आर्थिक बोझ के खिलाफ है। कारोबारियों का तर्क है कि यदि यह शुल्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास या देशहित में लगाया जाता तो वे इस पर विचार कर सकते थे। हालांकि, बैंकों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत लादना अनुचित है।
पांच दिवसीय विशेष जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा तय
संगठन के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि 23 सितंबर को मनाए गए नो UPI डे के बाद अब आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा रहा है। इसके अगले चरण में अगले पांच दिनों तक शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान दुकानदारों को प्रस्तावित शुल्क के दूरगामी दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा और उन्हें एकजुट रहने का आह्वान किया जाएगा।
QR कोड हटाकर पारंपरिक व्यापार प्रणाली की ओर लौटने का संकेत
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था पर अतिरिक्त लागत लगाना छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। आने वाले दिनों में बाजारों से मिलने वाले समर्थन और शासन के रुख के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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MDR शुल्क वापस न होने तक नकद भुगतान को दी जाएगी प्राथमिकता
व्यापारियों का कहना है कि जब तक सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट से जुड़ा प्रस्तावित शुल्क वापस नहीं लेती, तब तक वे डिजिटल भुगतान की सुविधाएं बंद रखेंगे और केवल नकद लेनदेन को ही प्राथमिकता देंगे। बैठक के दौरान कारोबारियों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और प्रस्तावित सरचार्ज के खिलाफ नारे लगाए।
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अतिरिक्त शुल्क से व्यापारिक लागत बढ़ने का दावा
चैंबर अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त शुल्क लागू होने से व्यापार संचालन की लागत में बढ़ोतरी होगी। पहले से ही बढ़ती महंगाई, ऊंचे परिचालन खर्च और घटते मुनाफे की चुनौतियों से जूझ रहे छोटे व मध्यम कारोबारियों पर यह नया आर्थिक बोझ डालना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। उपस्थित सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से इस शुल्क को तुरंत वापस लेने की मांग की।
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नीतियों का नहीं, केवल अनावश्यक आर्थिक बोझ का विरोध
चैंबर नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि व्यापारी समाज हमेशा से देश के विकास और सरकारी नीतियों के समर्थन में खड़ा रहा है। यह विरोध सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अनुचित आर्थिक बोझ के खिलाफ है। कारोबारियों का तर्क है कि यदि यह शुल्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास या देशहित में लगाया जाता तो वे इस पर विचार कर सकते थे। हालांकि, बैंकों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत लादना अनुचित है।
पांच दिवसीय विशेष जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा तय
संगठन के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि 23 सितंबर को मनाए गए नो UPI डे के बाद अब आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा रहा है। इसके अगले चरण में अगले पांच दिनों तक शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान दुकानदारों को प्रस्तावित शुल्क के दूरगामी दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा और उन्हें एकजुट रहने का आह्वान किया जाएगा।
QR कोड हटाकर पारंपरिक व्यापार प्रणाली की ओर लौटने का संकेत
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था पर अतिरिक्त लागत लगाना छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। आने वाले दिनों में बाजारों से मिलने वाले समर्थन और शासन के रुख के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
