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Indore: अवैध बताकर 22 साल पहले तोड़ी थी बिल्डिंग, अब देना होगा तीन करोड़ का हर्जाना

Sat, 30 Jul 2022 05:54 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 30 Jul 2022 05:54 PM IST
सार

इंदौर जिला प्रशासन पर एक पुराना मामला भारी पड़ता नजर आ रहा है। 22 साल पहले मनोरमा गंज में डायनामाइट से जमींदोज की गई बिल्डिंग के हर्जाने के रूप में अब करीब तीन करोड़ की क्षतिपूर्ति देने के आदेश जिला कोर्ट ने दिए हैं। 

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Indore: The building was demolished 22 years ago, now you will have to pay a damages of three crores
कोर्ट ने प्रशासन को करीब तीन करोड़ का हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इंदौर जिला प्रशासन पर एक पुराना मामला भारी पड़ता नजर आ रहा है। 22 साल पहले मनोरमा गंज में डायनामाइट से जमींदोज की गई बिल्डिंग के हर्जाने के रूप में अब करीब तीन करोड़ की क्षतिपूर्ति देने के आदेश जिला कोर्ट ने दिए हैं। इंदौर के इतिहास में संभवतः यह पहला मामला है, जिसमें किसी कार्रवाई के बदले प्रशासन को इतनी बड़ी रकम की भरपाई करनी होगी। 
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जानकारी के अनुसार मामला 22 साल पुराना है। जून 2000 में बिल्डर विनोद लालवानी के कब्जे वाली बहुमंजिला इमारत प्रिंसेस पैराडाइज के बारे में किसी ने शिकायत की थी कि उक्त इमारत अतिक्रमण करके सरकारी जमीन पर बनी है।  इसके बाद प्रशासन का अमला 23 जून 2000 को अलसुबह मनोरमागंज पहुंचा और डायनामाइट लगाकर इमारत को ध्वस्त कर दिया था। कार्रवाई के वक्त भवन मालिक सुरेश चंद भार्गव और परिजनों ने कहा भी था कि अतिक्रमण की बात झूठी है, ये उनके मालिकाना हक की जमीन है। लेकिन प्रशासन ने बिना सुने कार्रवाई कर दी। जबकि भार्गव परिवार के लोग पहले ही कोर्ट से स्टे लेकर बैठे हुए थे। 
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मामले में सुरेश चंद भार्गव उनके पुत्र चेतन भार्गव व पुत्री रचना भार्गव कोर्ट की शरण में पहुंचे। उन्होंने जिला कोर्ट में दीवानी दावा ठोक दिया, साथ ही प्रशासन से एक करोड़ 26 लाख 91 हजार 441 रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग की। पीड़ित पक्ष का कहना था कि उनकी इमारत नगर निगम द्वारा मंजूर थी, जिसका उन्होंने जैमिनी कंस्ट्रक्शन से करीब सवा करोड़ रुपए में निर्माण कार्य करवाया था। समय-समय पर समस्त प्रकार के करों की अदायगी भी होती रहती थी, लेकिन प्रशासन ने बलपूर्वक निजी जमीन पर बनी इमारत को चरागाह की सरकारी जमीन पर हुआ अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया। 
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22 साल कोर्ट में चले मामले में जज विजय डांगी ने कलेक्टर व तहसीलदार नजूल के खिलाफ आदेश पारित करते हुए आदेश दिए कि भार्गव परिवार को एक करोड़ 26 लाख रुपये की नुकसान की भरपाई करें और इस राशि पर इमारत तोड़ने की तारीख से 6% की दर से ब्याज यानी करीब पौने दो करोड़ भी अदा करें। परिजनों ने कोर्ट के समक्ष मुख्य रूप से तर्क दिया था कि प्रशासन ने उनकी इमारत की जगह का बकायदा स्थाई प्लान पास किया था, जहां साइट प्लान पास होती है, वह निजी जमीन होती है. इस पर प्रशासन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। 


जमीन मालिक चेतन भार्गव ने बताया कि प्रशासन ने कार्रवाई के पहले हमें नोटिस तक नहीं दिया था। कार्रवाई वाले दिन ही दोपहर 12.30 बजे हमें कोर्ट से स्टे मिल गया था, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने हठधर्मिता दिखाते हुए स्टे ऑर्डर लेने से इनकार कर दिया। दोपहर ढाई बजे तक इमारत जमींदोज कर दी गई थी। चेतन भार्गव के मुताबिक प्रशासन की टीम हमारी इमारत के पास बनी किसी दूसरी इमारत के खिलाफ कार्रवाई करने आई थी, लेकिन गफलत के चलते हमारे खिलाफ कार्रवाई कर दी गई।
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