इंदौर: पेड़ की छांव में लगती है खाकी वर्दी वाले की पाठशाला, गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे हैं कॉन्स्टेबल संजय
पुलिस की पहचान वर्दी, ड्यूटी और कानून-व्यवस्था से होती है। इंदौर में एक पुलिसकर्मी की वर्दी बच्चों के लिए उम्मीद की पहचान बन गई है। लालबाग की पेड़ों की छांव में वे बच्चों को पढ़ाते है और उनका भविष्य संवारते है।
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इंदौर का लालबाग हर रविवार एक अनोखी पाठशाला का गवाह बनता है। यहां पेड़ की छांव में साठ से ज्यादा बच्चे जुटते हैं और उन्हें इंतजार रहता है वर्दी वाले मास्टरजी का। उन्हें पढ़ाते हैं पुलिस कॉन्स्टेबल संजय सांवरे। पुलिस ड्यूटी पूरी करने के बाद संजय रोज लालबाग आते है और खुले आसमान की पाठशाला में बच्चों का भविष्य संवारते है। पिछले करीब दस साल से वे गरीब और झुग्गी-बस्ती के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। कई बच्चों की स्कूल फीस, किताबें और स्टेशनरी का खर्च भी वे अपनी सैलरी से उठाते हैं।
संजय खुद संघर्षों के बीच पढ़कर पुलिस विभाग में पहुंचे हैं। इसी अनुभव ने उन्हें जरूरतमंद बच्चों के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। वे कहते हैं कि लोग समझते हैं कि मदद सिर्फ पैसों से होती है, लेकिन इन बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत शिक्षा की थी। इसलिए शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया।
उन्होंने 2016 में सिर्फ तीन बच्चों से यह पाठशाला शुरू की थी। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई और अब साठ से अधिक बच्चे नियमित रूप से पढ़ने आते हैं। बच्चों का पढ़ाई में मन लगा रहे, इसके लिए हर सप्ताह पढ़ाई के साथ अलग-अलग गतिविधियां भी कराई जाती हैं।
संजय का सपना है कि इस पाठशाला के बच्चे पढ़-लिखकर अच्छी नौकरियों और सरकारी सेवाओं में जाएं। इस काम में अब उनके कुछ मित्र भी सहयोग करने लगे हैं। बच्चों के लिए की जा रही इस पहल के लिए संजय को कई जगह सम्मानित भी किया जा चुका है।
