Indore: सावरकर के पोते सात्यकी ने कहा- वीर सावरकर को समझने में कमी रह गई
वीर सावरकर के पोते सात्यकी ने कहा कि देश के सामने हमेशा उनका क्रांतिकारी स्वरूप ही सामने आता है, लेकिन वे हिन्दू धर्म के अच्छे ज्ञाता थे। उन्होंने हिन्दू धर्म को गहराइयों को गहराई अध्ययन किया। इसका वर्णन वे हमेशा अपने साहित्य में भी करते थे।
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वीर सावरकर के पोते सात्यकी इंदौर में थे। वे एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने अपने दादा के बारे में कहा कि वीर सावरकर को समजने में थोड़ी कभी रह गई। वे दूरदृष्टा विचारक, भावुक कवि, समाज सुधारक थे। हमेशा उन्होंने देश की आजादी के बारे में सोचा, लेकिन वे सत्ताधारी दल के द्वेष का शिकार रहे। देशवासियों के सामने उनके अधूरे व्यक्तित्व को पेश किया गया। उनका व्यक्तित्व शोध और गहन अध्ययन का विषय है।
सात्यकी ने कहा कि देश के सामने हमेशा उनका क्रांतिकारी स्वरूप ही सामने आता है, लेकिन वे हिन्दू धर्म के अच्छे ज्ञाता थे। उन्होंने हिन्दू धर्म को गहराइयों को गहराई अध्ययन किया। इसका वर्णन वे हमेशा अपने साहित्य में भी करते थे। आजादी के पहले देश में व्याप्त जात-पात की छुआ छूत की समस्याओं के विरुद्ध न सिर्फ आवाज उठाई बल्कि रत्नागिरी में एक मंदिर भी बनाया। इस तरह का उदाहरण किसी समाजसुधारक ने पेश नहीं किया।
कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि सावरकर के जीवन के अन्य पहलुओं पर भी मनन की जरूरत है। वे स्वातंत्र्य वीर तो थे ही, साथ ही विज्ञान निष्ठ, मराठी, हिन्दी भाषा के विद्वान थे उन्होंने संसदीय भाषा वाली में भी अनेक शब्द दिए जो आज प्रचलन में है।
कीर्तीश धामारीकर शास्त्री, अजय करंदीकर ने बताया कि इस कार्यक्रम मे वीर सावरकर के सकाळ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित चार पुस्तक खंडो का लोकार्पण किया गया।अतिथियों का स्वागत गिरीश देशपांडे ने किया।
