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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Pandit Dhirendra Shastri's Katha may be held in Indore in February, plan for padayatra is being prepar

Indore: फरवरी में पं.धीरेंद्र शास्त्री की हो सकती है इंदौर में कथा, पदयात्रा की योजना हो रही तैयार

Mon, 02 Dec 2024 07:50 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 02 Dec 2024 07:50 PM IST
सार

इंदौर में चल रहे हिन्दू सेवा मेले में हाल ही में पंडित धीरेंद्र शास्त्री शामिल हुए थे लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे आना नही चाहते थे। आयोजनों ने उन्हें लाने की जिम्मेदारी इंदौर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमीत सूरी को दी।

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Indore: Pandit Dhirendra Shastri's Katha may be held in Indore in February, plan for padayatra is being prepar
पं धीरेंद्र शास्त्री। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

158 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मालवा निमाड़ क्षेत्र में भी एक पदयात्रा निकाल सकते है। इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस बात के संकेत दिए, लेकिन अभी तिथि तय नहीं हो पाई है।

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फरवरी माह में इंदौर में उनकी एक कथा भी होने वाली है। उसके बाद पैदलयात्रा की अंतिम रणनीति को मूर्त रुप दिया जा सकता है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने बागेश्वर धाम से अेारछा तक 9 दिन की पैदल यात्रा निकाली थी। जिसमें उन्होंने जात-पात, छुआ छूत को हटाकर हिन्दू को एकजुट करने का आव्हान लोगों से किया।

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इंदौर में चल रहे हिन्दू सेवा मेले में हाल ही में पंडित धीरेंद्र शास्त्री शामिल हुए थे। पदयात्रा समाप्त होने के दूसरे दिन उन्हें मेले में बुलाया गया था, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे आना नही चाहते थे। आयोजनों ने उन्हें लाने की जिम्मेदारी इंदौर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमीत सूरी को दी।

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वे दिल्ली से चार्टर विमान लेकर खजुराहों पहुंचे और बागेश्वर सरकार को इंदौर लेकर आए थे। तब मंच से ही बागेश्वर सरकार ने इंदौर को भी अगली पदयात्रा में शामिल करने की बात कही थी।




उनके अनुयायी इस बात को लेकर उत्साहित है कि इंदौर से उनकी यात्रा निकलेगी। माना जा रहा है कि मालवा निमाड़ में इस पदयात्रा का रुट हो सकता है,क्योकि सबसे ज्यादा आदिवासी क्षेत्र मालवा निमाड़ में है। धर्मांतरण के मामले भी सबसे ज्यादा झाबुआ, देवास से जुड़े आदिवासी क्षेत्रों में सामने आते है।

 

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