{"_id":"68f9da9eed3a6670d70be87d","slug":"indore-news-weather-update-rain-forecast-cold-nights-winter-2025-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore News: बदल रहा मौसम का मिजाज! अरब सागर से आया तूफान, इंदौर में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore News: बदल रहा मौसम का मिजाज! अरब सागर से आया तूफान, इंदौर में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
Thu, 23 Oct 2025 03:05 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 23 Oct 2025 03:05 PM IST
सार
Indore News: अरब सागर में बने एक लो-प्रेशर सिस्टम के कारण इंदौर समेत मध्य प्रदेश के दक्षिणी जिलों में मौसम बदल गया है। मौसम विभाग ने इंदौर संभाग में अगले 4 दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है।
विज्ञापन
इंदौर विजय नगर क्षेत्र
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में बने एक निम्न दाब क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) का असर मध्य प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में दिखाई देने लगा है। कुछ जिलों में बारिश हुई है और मौसम विभाग ने इंदौर समेत कई जिलों में अगले तीन दिन तक और बारिश की संभावना जताई है। पिछले 24 घंटों के दौरान ग्वालियर और जबलपुर समेत 12 जिलों में बूंदाबांदी और गरज-चमक का दौर देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा ही मौसम अगले चार दिनों तक बने रहने की संभावना है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि यह सिस्टम आगे बढ़ रहा है, जिससे प्रदेश में मौसम बदला हुआ है। इसके अतिरिक्त, उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) भी सक्रिय है।
यह भी पढ़ें...
Indore News: ठंड और प्रदूषण से इंदौर में 'वायरल' विस्फोट, MYH-जिला अस्पताल में मरीजों की लाइनें
इंदौर-जबलपुर संभाग में दिखेगा असर
मौसम विभाग के मुताबिक, इस सिस्टम का मुख्य असर अगले 4 दिनों तक दक्षिणी जिलों में देखने को मिलेगा। विशेष रूप से 24, 25 और 26 अक्टूबर को इंदौर, नर्मदापुरम और जबलपुर संभाग के जिलों में इसका प्रभाव दिखाई देगा। इससे पहले, पिछले 24 घंटों में ग्वालियर, छिंदवाड़ा और जबलपुर समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। दिवाली की रात भी जबलपुर में पौन इंच पानी गिरा था।
विज्ञापन
दिन में गर्मी, रात में ठंडक
प्रदेश में हल्की बारिश, गरज-चमक और आंधी के बीच मौसम का मिजाज बदल गया है। रातें ठंडी हो गई हैं, जबकि दिन अभी भी गर्म बने हुए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अक्टूबर महीने में मौसम ऐसा ही बना रहेगा। तेज ठंड का दौर नवंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। बुधवार को कई शहरों में दिन का तापमान बढ़ा, जबकि रात के पारे में गिरावट दर्ज की गई।
नवंबर से कड़ाके की सर्दी का अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। नवंबर से शुरू होने वाला ठंड का दौर जनवरी तक चलेगा, लेकिन इस बार फरवरी तक भी ठंड का असर रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2010 के बाद यह सबसे भीषण ठंड हो सकती है। इसका कारण उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ और जल्द विकसित हो रही 'ला-नीना' परिस्थितियां हैं, जिससे इस बार सर्दियों में सामान्य से अधिक बारिश भी हो सकती है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें...
Indore News: ठंड और प्रदूषण से इंदौर में 'वायरल' विस्फोट, MYH-जिला अस्पताल में मरीजों की लाइनें
विज्ञापन
इंदौर-जबलपुर संभाग में दिखेगा असर
मौसम विभाग के मुताबिक, इस सिस्टम का मुख्य असर अगले 4 दिनों तक दक्षिणी जिलों में देखने को मिलेगा। विशेष रूप से 24, 25 और 26 अक्टूबर को इंदौर, नर्मदापुरम और जबलपुर संभाग के जिलों में इसका प्रभाव दिखाई देगा। इससे पहले, पिछले 24 घंटों में ग्वालियर, छिंदवाड़ा और जबलपुर समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। दिवाली की रात भी जबलपुर में पौन इंच पानी गिरा था।
विज्ञापन
दिन में गर्मी, रात में ठंडक
प्रदेश में हल्की बारिश, गरज-चमक और आंधी के बीच मौसम का मिजाज बदल गया है। रातें ठंडी हो गई हैं, जबकि दिन अभी भी गर्म बने हुए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अक्टूबर महीने में मौसम ऐसा ही बना रहेगा। तेज ठंड का दौर नवंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। बुधवार को कई शहरों में दिन का तापमान बढ़ा, जबकि रात के पारे में गिरावट दर्ज की गई।
नवंबर से कड़ाके की सर्दी का अलर्ट
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। नवंबर से शुरू होने वाला ठंड का दौर जनवरी तक चलेगा, लेकिन इस बार फरवरी तक भी ठंड का असर रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2010 के बाद यह सबसे भीषण ठंड हो सकती है। इसका कारण उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ और जल्द विकसित हो रही 'ला-नीना' परिस्थितियां हैं, जिससे इस बार सर्दियों में सामान्य से अधिक बारिश भी हो सकती है।
